शुक्रवार, 26 मई 2017

मुक्तक

मै तेरा नाम हो जाऊ..,
तू मेरा नाम हो जाये,
मै तेरा दाम हो जाऊ..
तू मेरा दाम हो जाये,
न राधा सा न मीरा सा
विरह मंजूर है मुझको....

बनो तुम रूक्मिनी मेरी...
"पवन"तेरा श्माम हो जाये...।

पाप को पुण्य में भुगतान की आदत है मुझे।।
यानि हर दर्द के सम्मान की आदत है मुझे।।
तुम्हे खुशियाँ हो मुबारक हो मेरे  दोस्त,
मैं पवन हूँ दर्दे तुफा की आदत है मुझेl