मंगलवार, 25 जून 2024

संगठन का महत्व

एक बार एक आदमी सड़क पर बैठा था। पत्थर उठाया कुत्ते को मारा, कुत्ता भाग गया।
       वहीं आदमी पेड़ के नीचे बैठा था पत्थर उठाया और मधुमक्खी के छत्ते को जा मारा, आदमी भाग गया। आदमी को भागना पड़ा।
          कुत्ता अकेला था और मधुमक्खी संगठन/समूह में।
हमको इस बात पर चिंतन करना चाहिए, हममें कहीं एकता हो जाये तो यह कुछ धर्म विरोधियों को भागना पड़ेगा।

       *संकलन - पवन नेताम 'श्रीबासु'*

द्रौपदी मुरूमु

*एक सुंदर कहानी* 

*_कलेक्टर मैडम, आप 'मेकअप' क्यों नहीं करती...?_*

मलप्पुरम की जिला कलेक्टर सुश्री रानी सोयामोई... कॉलेज के छात्रों से बातचीत करती हैं।

उन्होंने कलाई घड़ी के अलावा कोई आभूषण नहीं पहना था।
सबसे ज्यादा छात्रों को आश्चर्य हुआ कि उन्होंने 'फेस पाउडर' का भी इस्तेमाल नहीं किया।

भाषण अंग्रेजी में था। उन्होंने केवल एक या दो मिनट ही बोला, लेकिन उनके शब्द दृढ़ संकल्प से भरे थे।

फिर बच्चों ने कलेक्टर से कुछ सवाल पूछे।

प्रश्न: आपका नाम क्या है?

मेरा नाम रानी है, सोयामोई मेरा पारिवारिक नाम है। मैं झारखंड की मूल निवासी हूं।
...और कुछ पूछना है?

दर्शकों में से एक दुबली-पतली लड़की खड़ी हुई।

"पूछो, बच्चे..."

"मैडम, आप मेकअप क्यों नहीं करतीं?"

कलेक्टर का चेहरा अचानक पीला पड़ गया। उनके पतले माथे पर पसीना आ गया। उनके चेहरे की मुस्कान फीकी पड़ गई। दर्शक अचानक चुप हो गए।

उन्होंने टेबल पर रखी पानी की बोतल खोली और थोड़ा पानी पिया। फिर उसने धीरे से छात्र को बैठने का इशारा किया। 
फिर वह धीरे से बोलने लगी।

"तुमने एक परेशान करने वाला सवाल पूछा है। यह ऐसा सवाल है जिसका जवाब एक शब्द में नहीं दिया जा सकता। मुझे जवाब में तुम्हें अपनी जीवन कहानी सुनानी है। मुझे बताओ कि क्या तुम मेरी कहानी के लिए अपने कीमती दस मिनट निकालने को तैयार हो?"

"तैयार..."

मेरा जन्म झारखंड के एक आदिवासी इलाके में हुआ था। कलेक्टर ने रुककर दर्शकों की ओर देखा।

"मेरा जन्म कोडरमा जिले के आदिवासी इलाके में एक छोटी सी झोपड़ी में हुआ था, जो _'मीका'_ खदानों से भरा हुआ था।

मेरे पिता और माता खनिक थे। मेरे दो बड़े भाई और एक छोटी बहन थी। हम एक छोटी सी झोपड़ी में रहते थे जिसमें बारिश होने पर पानी टपकता था।
     मेरे माता-पिता कम वेतन पर खदानों में काम करते थे क्योंकि उन्हें कोई और काम नहीं मिल पाया था। यह बहुत गंदा काम था।

जब मैं चार साल की थी, तब मेरे पिता, माता और दो भाई कई बीमारियों के कारण बिस्तर पर पड़े थे।

उस समय उन्हें यह नहीं पता था कि यह बीमारी खदानों में मौजूद घातक 'मीका धूल' को अंदर लेने से होती है।
   जब मैं पाँच साल की थी, मेरे भाई बीमारी से मर गए।"

एक छोटी सी आह भरकर कलेक्टर ने बोलना बंद कर दिया और अपने रूमाल से अपनी आँखें पोंछ लीं।

     "ज़्यादातर दिनों में हमारा भोजन सादा पानी और एक या दो रोटियाँ हुआ करता था। मेरे दोनों भाई गंभीर बीमारी और भूख के कारण इस दुनिया से चले गए। मेरे गाँव में, डॉक्टर तो छोड़िए, स्कूल भी नहीं था। क्या आप ऐसे गाँव की कल्पना कर सकते हैं जहाँ स्कूल, अस्पताल या शौचालय न हो, बिजली न हो?

एक दिन मेरे पिता ने मेरा भूखा, चमड़ी और हड्डियों से लथपथ हाथ पकड़ा और मुझे टिन की चादरों से ढकी एक बड़ी खदान में ले गए।
       यह एक अभ्रक की खदान थी जिसने समय के साथ बदनामी हासिल कर ली थी।

यह एक पुरानी खदान थी जिसे खोदा गया और खोदा गया, जो अंतहीन रूप से पाताल में फैली हुई थी। मेरा काम नीचे की छोटी-छोटी गुफाओं में रेंगना और अभ्रक अयस्क इकट्ठा करना था। यह केवल दस साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ही संभव था।

अपने जीवन में पहली बार, मैंने पेट भर रोटियाँ खाईं। लेकिन उस दिन मुझे उल्टी हो गई।

 जिस समय मुझे प्रथम श्रेणी में होना चाहिए था, मैं अंधेरे कमरों में अभ्रक इकट्ठा कर रही थी, जहाँ मैं ‘जहरीली धूल’ में साँस ले रहा था।

कभी-कभार ‘भूस्खलन’ में दुर्भाग्यपूर्ण बच्चों का मर जाना असामान्य नहीं था। और कभी-कभी कुछ ‘घातक बीमारियों’ से भी मर जाते थे

दिन में आठ घंटे काम करने के बाद, आप कम से कम एक बार के भोजन के लिए कमा पाते थे। मैं भूख और हर दिन जहरीली गैसों के साँस लेने के कारण दुबली और निर्जलित हो गई थी।

एक साल बाद मेरी बहन भी खदान में काम करने लगी। जैसे ही वे (पिता) थोड़े ठीक हुए, ऐसा समय आया कि मेरे पिता, माँ, बहन और मैं एक साथ काम करते थे और हम बिना भूख के रह सकते थे।

लेकिन किस्मत ने हमें दूसरे रूप में परेशान करना शुरू कर दिया था। एक दिन जब मैं तेज बुखार के कारण काम पर नहीं जा रही थी, अचानक बारिश हुई। खदान के नीचे काम करने वाले श्रमिकों पर खदान गिरने से सैकड़ों लोग मारे गए। उनमें मेरे पिता, माँ और बहन भी थे।"

        रानी की दोनों आँखों से आँसू बहने लगे। दर्शकों में हर कोई साँस लेना भी भूल गया। कई लोगों की आँखें आँसुओं से भर गईं।

      "आपको याद रखना होगा कि मैं सिर्फ़ छह साल की थी।
आखिरकार मैं सरकारी अगाती मंदिर पहुँची। वहाँ मेरी शिक्षा हुई। मैंने अपने गाँव से ही अपनी पहली अक्षर-पद्धति सीखी थी। आखिरकार यहाँ कलेक्टर आपके सामने हैं।

आप सोच रहे होंगे कि इसका और इस बात का क्या संबंध है ? कि मैं मेकअप का इस्तेमाल नहीं करती।"

उसने दर्शकों की तरफ देखते हुए कहा।

"अपनी शिक्षा के दौरान ही मुझे एहसास हुआ कि उन दिनों अँधेरे में रेंगते हुए मैंने जो सारा अभ्रक इकट्ठा किया था, उसका इस्तेमाल मेकअप उत्पादों में किया जा रहा था।
   *अभ्रक पहला प्रकार का मोती जैसा सिलिकेट खनिज है।*
        कई बड़ी कॉस्मेटिक कंपनियों द्वारा पेश किए जाने वाले खनिज मेकअप में, आपकी त्वचा के लिए सबसे चमकीला रंग बहुरंगी अभ्रक से आता है, *जिसे 20,000 छोटे बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर निकालते हैं।*

गुलाब की कोमलता उनके जले हुए सपनों, उनके बिखरते जीवन और चट्टानों के बीच कुचले गए उनके मांस और खून के साथ आपके गालों पर फैलती है।
      खदानों से बच्चों के हाथों से उठाए गए लाखों डॉलर के अभ्रक का इस्तेमाल आज भी किया जाता है। हमारी सुंदरता को बढ़ाने के लिए।"

"अब आप ही बताइए।
मैं अपने चेहरे पर मेकअप कैसे लगाऊं? मैं अपने भाइयों की याद में पेट भरकर कैसे खाऊं जो भूख से मर गए? मैं अपनी मां की याद में महंगे रेशमी कपड़े कैसे पहनूं जिन्होंने कभी अच्छे कपड़ों के बारे में सपने में भी नहीं सोचा था?"

     जब रानी चली गईं तो पूरा दर्शक अनजाने में ही खड़ा हो गया, उनके होठों पर हल्की मुस्कान थी, आँखों में आँसू पोंछे बिना, उनका सिर ऊँचा था।

(झारखंड में अभी भी उच्चतम गुणवत्ता वाला अभ्रक खनन किया जाता है। 20,000 से अधिक छोटे बच्चे स्कूल जाने के बिना वहां काम करते हैं। वे मर जाते हैं, कुछ भूस्खलन में और कुछ बीमारी से...)

कई साल बाद... 
वह महिला कलेक्टर, भारत गणराज्य की पहली नागरिक बनीं
*महामहिम* 
*द्रौपदी मुरूमु*
*भारत गणराज्य की राष्ट्रपति !*

जीवनमे *अत्यधिक संघर्ष होना* आपको अधिक व कुछ विशेष देने के संकेत भी हो सकते है, अतः हिम्मत ना हारे, परमात्मा पे विश्वास दृढ़ रखे।

सदैव प्रसन्न व सकारात्मक रहिये

रविवार, 10 सितंबर 2023

कहानी

🪔🪔🪔🪔🪔🏵️🪔🪔🪔🪔🪔
           *🔸सामाजिक बनीये...!🔸*

*एक चूहा एक कसाई के घर में बिल बना कर रहता था।*

*एक दिन चूहेने देखा कि उस कसाई और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं। चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है । उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक चूहेदानी थी।*

*ख़तरा भाँपने पर उस ने पिछवाड़े में जा कर कबूतरको यह बात बताई कि, घर में चूहेदानी आ गयी है।*

*कबूतर ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे क्या? मुझे कौनसा उस में फँसना है?*

*निराश चूहा ये बात मुर्गेको बताने गया । मुर्गे ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा… जा भाई.. ये मेरी समस्या नहीं है।*

*हताश चूहे ने बाड़े में जा कर बकरे को ये बात बताई… और बकरा हँसते हँसते लोटपोट होने लगा।*

*उसी रात चूहेदानी में खटाक की आवाज़ हुई, जिस में एक ज़हरीला साँप फँस गया था। अँधेरे में उसकी पूँछ को चूहा समझ कर उस कसाई की पत्नी ने उसे निकाला और साँप ने उसे डस लिया।*

*तबीयत बिगड़ने पर उस व्यक्ति ने हकीम को बुलवाया। हकीम ने उसे कबूतरका सूप पिलाने की सलाह दी।*

*कबूतर अब पतीले में उबल रहा था।*

*खबर सुनकर उस कसाई के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुँचे जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन उसी मुर्गे को काटा गया।*

*कुछ दिनों बाद उस कसाई की पत्नी सही हो गयी, तो खुशी में उस व्यक्ति ने कुछ अपने शुभचिंतकों के लिए एक दावत रखी तो बकरे को काटा गया।*

*चूहा अब दूर जा चुका था, बहुत दूर ……….।*

*🔸अगली बार कोई आपको अपनी समस्या बतायेे और आप को लगे कि ये मेरी समस्या नहीं है, तो रुकिए और दुबारा सोचिये।*

*🔸समाज का एक अंग, एक तबका, एक नागरिक खतरे में है तो पूरा समाज व पूरा देश खतरे में है।*

*🔸अपने-अपने दायरे से बाहर निकलिये। स्वयं तक सीमित मत रहिये। सामाजिक बनिये ।*
🪔🪔🪔🪔🪔🏵️🪔🪔🪔🪔🪔

मुक्तक

एक दिवाना हूँ दिल को निकाल रख दूंगा।
मिले जो दिल तो दिल को सम्हाल रख लूंगा।
रगो मे बह रही है खून सिर्फ तेरे प्यार की,
यकीं नहीं  तो  वो  भी निकाल रख दूंगा।

चुराता हूँ नजर जब जब तू मेरे पास होती है!
मगर दिनरात इन नजरों को तेरी प्यास होती है!
मैं शर्मीला हूँ कह पाता नही लेकिन मेरी जानम,
खुदा से बस तेरे ही नाम की अरदास होती है!!

मेंरे चिट्ठी को पढ़कर वो वहां जब मुस्कुराती है !
हवा तब-तब मेरे कानों में आकर गुनगुनाती है!
मुझे यादों से उसकी एक पल फुर्सत नही मिलती,
मैं सो जाता हूँ पर ख्वाबो में वो मुझको सताती है!!

रामसेतु सी प्रेम की निशानी नही देखी !
राधाकृष्ण सी प्रेम की कहानी नही देखी !
खुद के लिए नही देश के काम आई जो,
भगत सिंह सी आजतक जवानी नही देखी!!

प्रेम  पावन है मैं तुमको एक दिन ये बताऊंगा।
हृदय मंदिर में एक दीपक प्रेम का मैं जलाऊंगा।
प्रेम पाना नही है त्याग है मीरा- राधा से सीखो तुम,
मैं उनकी दास्ता आकर तुम्हें इकदिन सुनाऊंगा।

सहेलियों के पीछे छुप-छुप, के वो दीदार करती थी।
मेरे काँलेज की थी लड़की,जो मुझसे प्यार करती थी।
किसी भी मोड़ पर उनसे, कही हो जाता जो तकरार
तो झुकी नजरों से अपने प्यार का, वो इजहार करती थी
               पवन नेताम 'श्रीबासु'
                कबीरधाम (छ.ग.)


बाली चाँदी के थे सोने का दाम क्यो लिखा।
हुआ ही नही था प्रेम तो अंजाम क्यो लिखा।
गर है जरा भी नही मुझ नाचीज़ से दिल्लगी,
तो छुप-छुप के मेंहदी से मेरा नाम क्यो लिखा।
                    पवन नेताम 'श्रीबासु'

मेहनत करते रहो नाम हो जायेगा

🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔸

मेंहनत करते रहो एक दिन नाम हो जाएगा।

मनचाहा तुझको हासिल मुकाम हो जाएगा।


रंजिश भरी इस जमाने मे घुल न जाना तुम,

आग सी फैलती बाते है बदनाम हो जाएगा।


तिमिर चिर रौशन कर जमी को रवि बनकर,

बदल दे आलम खुशनुमा अंजाम हो जाएगा।


तमन्ना ए ता उम्र आसमां मे उड़ने का रक्ख,

ए हौसले दुनियाको सबब पैगाम हो जाएगा।


खुवाईश तेरी नीलामी की मोल रखते है जो,

उनकी हर जमीर खुद  नीलाम हो जाएगा।


रख यकीं अपने हौसले पे वफा ही करेंगे'पवन',

तू सोना -चाँदी कोहिनूर के दाम हो जाएगा।


                  *पवन नेताम 'श्रीबासु'*

           *सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम*

भोले जी के सजत हे बरात

भोले जी सजत हे बरात , सजावय भूत पिशाच,
'के देवता सब हासय रे..'-2
के देवता सब हासय रे,-2 
कैलाश म..-2 भीड़ लगे हे अपार,भूत परेत दिखय झार, 
के देवता सब..


काने म पहिरावय बिच्छू के बाला,नर मुंडन के पहिरै माला।
चुपरे हावय अंगे भभुतिया, कनिहा पहिरै मृगन के छाला।
जनेऊ बने हे..-2 गौहा डोमी साँप, दुजे के चंदा चमके माथ
के देवता सब हासय रे..


बिना मुड़ी के भुतवा राजा, गदकावत हे गुदुम बाजा।
चटिया मटिया टिमकी दफड़ा, कहा पाबे भैया उहा झगड़ा।
सौरा भौरा ह..-2 सातो राग मिलाये, परेतवा देवय ताल बजाये,
के दुम दुमी बाजा बाजय रे..


रक्सीन टुरी गाना गावय, झिथरी परेतिन नाच दिखावय।
किसम किसम के नाच गाना, बुढ़वा नंदी के गोड़ थिरकाना।
घुघवा देवता..-2 पइसा ल उड़ाये, उछल मंगल सब मनाये
के देवता सब हासय रे-2
         

                  पवन नेताम 'श्रीबासु'
          सिल्हाटी, स/लोहारा, कबीरधाम
                दिनांक- 21/01/2018

रामायण मंच के लिए

गति,सद्गति, दुर्गति

क्रमशः बड़ा
शारिरीक सुख,मानसिक सुख,बौध्दिक सुख,सत्ता का सुख,आत्मिक सुख

कथा सुने से
ताप,संताप,पाप कम होथे

भगवान मिले या न मिले मानव ल मानव से मिलना चाहिए

जीवन मे क्या करना है रामायण सीखाती है।
क्या नही करना है महाभारत...
जीवन को कैसे जीना है ये भगवतगीता सीखती है

मेरे राम आइये भगवान आइये
मेरे भोजन को भोग लगाइये।2।
मेरे भोजन को भोग लगाइये..मेरे..


वासना के प्रेरणा से माया को भक्ति मिलता है
वासना सुर्पनखा, माया रावण, सीता राम
भक्ति के दो भाग

एक बंदर के बच्चा के भाति (भययुक्त)
दूसरा बिल्ली के बच्चा (निश्चिंत)

पेट के नाम सदा जगजीता
संझा खाबे बिहनिया रीता


एक बार सीता जी ने प्रश्न किया राघव से
आचरण आपका ये समझ न आया है |

गृहभोज गुरु मुनि मात ने खिलाया किन्तु
श्रेष्ठ स्वाद शबरी के बेर का बताया है |

मायापति आपकी ये कौन सी है माया कहो
शिष्टाचार नाथ कैसा आपने निभाया है |

राम बोले प्रिये मैंने शबरी सा प्रेम भाव
व्यंजनों में किसी के न आजतक पाया है ||


तुलसी के मानस सेतु
            --------//------//-------
त्रेताजुग म सिरी रामचंद्र ह,
                 सागर म सेतु बनाय रिहिस|
बेंदरा भलुवा बानर सेना ल,
                 वो सागर पार कराय रिहिस||
ये कलजुग म तुलसीदास ह,
                  सुग्घर मानस सेतु बनाय हे|
दुनियाँ भर के नर नारी ल, 
                     भवसागर ले पार कराय हे||
सिरी राम के बनाय सेतु ह,
                        देखव समय चक्र म टूटगे|
ये तुलसी के बनाय सेतु म,
                       देख कतको मनखे ह जुटगे||
सिरिफ दु देश ह जुड़े रिहिस,
                         प्रभु राम के बनाय सेतु म|
देखव गाँव गाँव ह जुड़गे,
                           तुलसी के मानस सेतु म||
 बड़े-बड़े पथरा ल प्रभु ह, 
                     अपन रामसेतु म उफलाय हे|
ये तुलसी के मानस सेतु ह,
                           सब दुनिया ल तैराय हे||
वो रामसेतु ले बढ़के संगी,
                         ये तुलसी के मानस सेतु हे|
सब पढ़व अऊ सब तरव जी, 
                 मानस जनकल्याण के हेतु हे||
रचनाकार:- श्रवण कुमार साहू, "प्रखर".
शिक्षक/साहित्यकार, राजिम, गरियाबंद

एक कंजूस भगवान की पूजा करना चाहता था पर कोई खर्च न हो महात्मा का उपाय मन से पूजा करो
(लोभ मे भगवान प्रगट हो गया)

ब्रह्मा की बेटी
कुमति सुमति