रविवार, 10 सितंबर 2023

रामायण मंच के लिए

गति,सद्गति, दुर्गति

क्रमशः बड़ा
शारिरीक सुख,मानसिक सुख,बौध्दिक सुख,सत्ता का सुख,आत्मिक सुख

कथा सुने से
ताप,संताप,पाप कम होथे

भगवान मिले या न मिले मानव ल मानव से मिलना चाहिए

जीवन मे क्या करना है रामायण सीखाती है।
क्या नही करना है महाभारत...
जीवन को कैसे जीना है ये भगवतगीता सीखती है

मेरे राम आइये भगवान आइये
मेरे भोजन को भोग लगाइये।2।
मेरे भोजन को भोग लगाइये..मेरे..


वासना के प्रेरणा से माया को भक्ति मिलता है
वासना सुर्पनखा, माया रावण, सीता राम
भक्ति के दो भाग

एक बंदर के बच्चा के भाति (भययुक्त)
दूसरा बिल्ली के बच्चा (निश्चिंत)

पेट के नाम सदा जगजीता
संझा खाबे बिहनिया रीता


एक बार सीता जी ने प्रश्न किया राघव से
आचरण आपका ये समझ न आया है |

गृहभोज गुरु मुनि मात ने खिलाया किन्तु
श्रेष्ठ स्वाद शबरी के बेर का बताया है |

मायापति आपकी ये कौन सी है माया कहो
शिष्टाचार नाथ कैसा आपने निभाया है |

राम बोले प्रिये मैंने शबरी सा प्रेम भाव
व्यंजनों में किसी के न आजतक पाया है ||


तुलसी के मानस सेतु
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त्रेताजुग म सिरी रामचंद्र ह,
                 सागर म सेतु बनाय रिहिस|
बेंदरा भलुवा बानर सेना ल,
                 वो सागर पार कराय रिहिस||
ये कलजुग म तुलसीदास ह,
                  सुग्घर मानस सेतु बनाय हे|
दुनियाँ भर के नर नारी ल, 
                     भवसागर ले पार कराय हे||
सिरी राम के बनाय सेतु ह,
                        देखव समय चक्र म टूटगे|
ये तुलसी के बनाय सेतु म,
                       देख कतको मनखे ह जुटगे||
सिरिफ दु देश ह जुड़े रिहिस,
                         प्रभु राम के बनाय सेतु म|
देखव गाँव गाँव ह जुड़गे,
                           तुलसी के मानस सेतु म||
 बड़े-बड़े पथरा ल प्रभु ह, 
                     अपन रामसेतु म उफलाय हे|
ये तुलसी के मानस सेतु ह,
                           सब दुनिया ल तैराय हे||
वो रामसेतु ले बढ़के संगी,
                         ये तुलसी के मानस सेतु हे|
सब पढ़व अऊ सब तरव जी, 
                 मानस जनकल्याण के हेतु हे||
रचनाकार:- श्रवण कुमार साहू, "प्रखर".
शिक्षक/साहित्यकार, राजिम, गरियाबंद

एक कंजूस भगवान की पूजा करना चाहता था पर कोई खर्च न हो महात्मा का उपाय मन से पूजा करो
(लोभ मे भगवान प्रगट हो गया)

ब्रह्मा की बेटी
कुमति सुमति 


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