बुधवार, 17 जनवरी 2018

दारू तिहार मनाना हे

राशन संग दारू पाये बर,कका ल दुबारा लाना हे।
बोनस तिहार मनागे, अब दारू तिहार मनाना हे।

ऐसो दारू खूब छागे, लोगन ल सरकारी चोचला भागे।
सरकार ठेका लीस त, चखना म छ.ग.चना मुर्रा आगे।
अब दूध दही घी बिसरगे, सरकारी दारू के जमाना हे..

अन पानी ल तियाग के, ढकर ढकर दारू ल पियत हे।
काढा़ बनकठ्ठा दवई नई लगय,अब तो दारू म जियत हे।
पिके परगे भुईया म,अब कहा पीना अऊकहा खाना हे..

पिके के आये हे कुकुर छाप,गारी गलोच म पाटत हे।
परे हे नाली तीर बाई भोरहा, ईहा कुकुर मन चाटत हे।
चल भैया जावन दव महू ल तो दारू बर लाईन लगाना हे...

                  पवन नेताम "श्रीबासु"
            सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

जी के जंजाल होगे...

जी के जंजाल
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जिनगी जी के जंजाल होगे ,
तोर सुरता में बारा हाल होगे ।
किंजरत रहिथों बइहा कस ,
गांव भर में मोर बदनाम होगे ।

फोकट के देखेंव तोर सपना ,
मोर नींद ह पूरा खराब होगे ।
मिलना जुलना कुछु नहीं ,
गांव भर में बवाल होगे ।

चंदा कस तोर चेहरा ह ,
गांव भर में धमाल होगे ।
हांसत बोलत रेंगत टूरी ,
मुन्नी कस बदनाम होगे ।
रचना
महेन्द्र देवांगन माटी
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