राशन संग दारू पाये बर,कका ल दुबारा लाना हे।
बोनस तिहार मनागे, अब दारू तिहार मनाना हे।
ऐसो दारू खूब छागे, लोगन ल सरकारी चोचला भागे।
सरकार ठेका लीस त, चखना म छ.ग.चना मुर्रा आगे।
अब दूध दही घी बिसरगे, सरकारी दारू के जमाना हे..
अन पानी ल तियाग के, ढकर ढकर दारू ल पियत हे।
काढा़ बनकठ्ठा दवई नई लगय,अब तो दारू म जियत हे।
पिके परगे भुईया म,अब कहा पीना अऊकहा खाना हे..
पिके के आये हे कुकुर छाप,गारी गलोच म पाटत हे।
परे हे नाली तीर बाई भोरहा, ईहा कुकुर मन चाटत हे।
चल भैया जावन दव महू ल तो दारू बर लाईन लगाना हे...
पवन नेताम "श्रीबासु"
सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम