मंगलवार, 16 जनवरी 2018

जी के जंजाल होगे...

जी के जंजाल
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जिनगी जी के जंजाल होगे ,
तोर सुरता में बारा हाल होगे ।
किंजरत रहिथों बइहा कस ,
गांव भर में मोर बदनाम होगे ।

फोकट के देखेंव तोर सपना ,
मोर नींद ह पूरा खराब होगे ।
मिलना जुलना कुछु नहीं ,
गांव भर में बवाल होगे ।

चंदा कस तोर चेहरा ह ,
गांव भर में धमाल होगे ।
हांसत बोलत रेंगत टूरी ,
मुन्नी कस बदनाम होगे ।
रचना
महेन्द्र देवांगन माटी
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