जी के जंजाल
*****************
जिनगी जी के जंजाल होगे ,
तोर सुरता में बारा हाल होगे ।
किंजरत रहिथों बइहा कस ,
गांव भर में मोर बदनाम होगे ।
फोकट के देखेंव तोर सपना ,
मोर नींद ह पूरा खराब होगे ।
मिलना जुलना कुछु नहीं ,
गांव भर में बवाल होगे ।
चंदा कस तोर चेहरा ह ,
गांव भर में धमाल होगे ।
हांसत बोलत रेंगत टूरी ,
मुन्नी कस बदनाम होगे ।
रचना
महेन्द्र देवांगन माटी
😀😀🌹🌹Ⓜ🌹🌹💐
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें