शक्ति के रूप हे नारी।
आथे हर जुग ले अवतारी।।
(1) शक्ति के वंशज अस तै,सत के विजय अस तै,स्व शक्ति ल अब तै जगा।
नारी शक्ति के आगे, परबत थर थर कापे,डर भय ल अब तोर भगा।
लड़की-लोहा पिघला मै देहू,छिन मे गला मै देहू,बादर छूवत परबत ल,तोड़ के झूका मै देहू।
(2) हौसला के डार पकड़के,बाधा मन ले लड़ झगड़के,जीत के तै जोति जला।
अब नारी के शक्ति देखादे, बैरी ल फासी चढ़ादे,देश के टार हर बला।
लड़की- बादर ले टोर लाहू, तारा ल बटोर लाहू, माँ भारती के चरन म, फूलवा कस बिखेर जाहूं।
पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम(छग)
संपर्क-9098766347
रचना दिनांक- 12/12/2018
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