सोमवार, 31 जुलाई 2023

खुद के अंदर

खुद के अंदर अब इंसान कहा रखतें है।
इंसानियत के वो ईमान कहां रखतें  है।

वृद्धाश्रम मे रोते छोड़ आते  है माँ-बाप,
अब घरो मे पुराना समान कहा रखतें है।

फिजूल की वाहवाही रखती है दुनिया,
अब सच्चाई की जुबान कहाँ रखतें है।

अच्छे दिन का इंतजार कितनो को है,
अच्छे संस्कार का ज्ञान कहाँ रखतें है।

आजकल कितने मकां बनते है शहर मे,
प्रेम वाली वो रोशनदान कहाँ रखते है।

उम्र गुजर गई इस शहर मे बसर करतें,
सफेद बालो की पहचान कहाँ रखतें है।

                   पवन नेताम 'श्रीबासु'
              सिल्हाटी, कबीरधाम छ.ग.

बेटी बचाओ

बेटी खुशियों की होती छांव..भैया बेटी बचाओ
बेटी बचाओ भैया बेटी बचाओ-2  बेटी अंगना....

बेटी के बिना जग अंधियारा, सूना होगा ये जग सारा।
गर बेटे को तुम चाहते हो, बेटी को तो क्यों मारते हो।
बिना बेटी के बेटा कहा पाओ,

देखोगे सूनी कलाई, बिन बहना के राखी न भाई।
बेटा कलप कलप रोएगा, रक्षाबंधन मे न सोएगा।
तीजा-पोला को कैसे मनाओ,

बन गये कही कन्यादानी, नाम तुम्हारे सद्ग्रन्थ बखानी।
नवरात मे किसको जिमाओगे, नवकन्या ढूंढ न पाओगे।
चाहिए लक्ष्मी तो बेटी घर लाओ...

                पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम(छग)

शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

छत्तीसगढ़िया हमर किसान

पागा कलगी बर मोर तुच्छ रचना कृपया स्वीकार करव
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छत्तीसगढ़िया रे किसान, हमर माटी के मितान।।
खेती करव रे किसान, हमर भुईंया के भगवान।।

धरव नांगर धर तुतारी, खेत डाहर जावव।
धरती दाई ल रिझा के, हरियर लुगरा ल पहिरावव।।
धरौ मन म धियान, तुमन हरव ग सुजान,छत्तीसगढ़िया रे 

आनी बानी के पेड़ लगावव, हमर माटी ल सुंदरावव।
आक्सीजन ल बुलाके,परदूषन ल भगावव।।
चलौ करव रे सरमदान(श्रम),तभे मिलही रे बरदान
छत्तीसगढ़िया रे किसान..

विदेशी खातू ल छोड़के, सवदेशी ल अपनावव।
माटी ह बिमार होवतहे,ईलाज ल करावव।
बढ़िया उगही जावा धान,आहि नवा रे बिहान छत्तीसगढ़िया रे..

तुहर किसानी करे ले भैया,जग संसार ह पाथे।
तुहरे ल खाके नेता, तोही ल गुरराथे।
देखावव अपन स्वाभिमान, बाढ़ही तुहर सम्मान छत्तीसगढ़िया रे किसान, हमर माटी के मितान।।
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रचना- पवन नेताम 'श्रीबासु'
    सिल्हाटी स/लोहारा
          कबीरधाम
14.07.2016