हमारे दिल के अंधेरो मे रोशनी दे दो।
करले तु मोहाब्बत जिन्दगी दे दो।
किया भूख ने मजबूर खुदखुशी के लिए।
मिटा न सको भूख तो खुदखुशी दे दो।
करू जो जिक्र मोहाब्बत तो बावला होकर।
मै कतरा कतरा लगा दूँ तुम शायरी दे दो।
फलक हो हमसे दूर, तो बन्दगी लगती है।
सनम देखें मेरा चेहरा तो शर्मिंदगी लगती है।
महफिल सजे कही मशहुर ए गज़ल से
तो वो महफिल ही एक जिन्दगी लगती है।
किसी के चेहरे अब दिल मे बसने लगे।
ये रूसवा भरी चेहरा अब हसने लगे।
इन आँखों ने बहुत इंतजार किया है,
अब वो पल मुझसे मिलने तरसने लगे।
पेड़ पीपल वाला आँगन अच्छा नही।
बिन माली के बागन अच्छा नही।
पैमाने इश्क का जाम उठा ले जरा,
सूना इश्क का ये दामन अच्छा नही।
*पवन नेताम "श्रीबासु"*
सिल्हाटी, स/लोहारा
उसने मेरी कब्र पे अपना घर बना लिया।
सारे कब्रिस्तान को अपना शहर बना लिया।
मेरे हाथों मे थमाकर प्यार की कलम,
उसने मुझे इस जहां मे शायर बना दिया।
उससे नज़रें मिलीं वो सनम हो गया।
मुझपे अच्छा खुदा का करम हो गया॥
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