जाड़ हा जनावत हे
बिहनिया ले डोकरा बबा कुडकुडावत हे
चिरइ चिरगुन पंख फड़फडावत हे
बडे बिहनिया झन उठीहा संगी
अब के जाड़ हा जनावत हे
दाई हा पनपुरवा बनावत हे
ददा मंद मंद मुचमुचावत हे
एति तेति झन गिंजरिहा संगी
अब के जाड़ हा जनावत हे
डोकरा बबा बिडी सुलगावत हे
डोकरी सरसों तेल कडकावत हे
आगी के तिर ले झन उठिया हा संगी
अब के जाड़ हा जनावत हे
भइसी बइठे पगुरावत हे
राउत ला भइसी लतीयावत हे
जाड मा झन नहाहू संगी
अब के जाड़ जनावत हे
भउजी लइका ला खिसियावत हे
लइका माटी मा नहावत हे
कातिक नोहाय झन जावा संगी
अब के जाड़ हा जनावत हे
“जय हो तोर नेट”
मोबाईल के जमाना हे,
चलत हे भारी नेट!
एकर चक्कर मा भात घलो,
नइ खवावय भर पेट! जय हो तोर
आठोकाल बारो महीना,
आषाण सावन जेठ! जय हो तोर नेट
उठत बईठत रेंगत दउड़त,
घंसत घंसत कोलगेट!
नई छोड़न मोबाइल ला,
भले काम मा जाये बर हो जय लेट! जय हो तोर
सब झन लगे हे मोबाईल मा,
गरीब होवय चाहे सेठ!
डोकरा बबा घलो हाथ उठाके,
खोजथे मोबाईल मा नेट!
कभू चढंहत हे अटरिया ता,
कभू चढ़हत हे गेट!
एकर चक्कर मा ले बर पडगे,
मँहगा वाला हेंडसेट!
जय हो तोर नेट!
जय हो तोर नेट!
फरा बाटव , चिला बाटव , बाटव रे तमसई,
ठेठरि बाटव , खुरमि बाटव,बाटव रे मुर्रा लाई,
करमा गालव , सुवा गालव, गालव गित सवनाई
"#छत्तीसगढ़_राज_सिरजन_दिवस"के आप जम्मो संगवारी मन ला कोरी कोरी बधाई !!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें