रविवार, 30 सितंबर 2018

एक दिन पारी आही


एक दिन पारी आही, जाये पारी आही,
ए पिंजरा ले सुवना उड़ा के चले जाही-2

दस म छोड़े बालकपन, तीस म छोड़े जवानी,
घुमे-फिरे दौड़े नाचे-गाये, सिरा गे तोरे कहानी।
घटाही वो हा घटाही, जिये के दिन ल घटाही,
तिल-तिल बीते उमरिया, बुढ़ापा धर लाही..

तीस म पहुंचे माया के दुनिया,कोल्हू के बइला फंदागे,
तीसे पचासे कमाई के जिनगी,प्रभु भजन ल भुलागे।
ले जाही वो हा ले जाही, मरघटिया ले जाही,
पिवरा गेहे पाना ह, धीरे-धीरे. अइलाही..

गये सिराये तोर जिनगी ह, कछु तै कर नइ पाये,
हालय डोलय माटी सरीरा, मने मन.. पछताये।
रोवाही वो हा रोवाही, सबला वो रोवाही,
जेन दिन ए पिंजरा ल, छोड़के चले जाही..

               पवन नेताम 'श्रीबासु'
सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम(छ.ग)

शुक्रवार, 28 सितंबर 2018

तै कारी हावस ओ

                                    ध्रुपद
लड़का- सोये कुकुर के मुह म टुरी लौड़ी झन डार -2
         -    तै कारी हावस वोs मोला चारा झन डार-2
लड़की- भागे ल सहरा टुरा जादा सोच झन बिचार-2
          -   तहू करिया हावस रेs जादा नखरा झन मार-2

                                अंतरा
लड़का- गांव के बड़ सिधवा लाईका,रहिथव ब्रह्मचारी,
                 ये रद्दा म रेंगव नही चाहे, कतको देवस तुतारी।
       ~      ए मया पिरित के माला, मोर गला म झन डार..

लड़की- सोवत जागत उठत बईठत,सुध ह तोर आथे,
               काम बुता कछु होवय नही मन बहि बरन हो जाथे।
       ~     बिन पानी के मछरी बरोबर, तरसा झन मार...

लड़का- तोर मया करलाई म मन, पीपर पाना कस     
                 डोलत हे।
लड़की- जल्दी हा कहिदे जिनगी निछावर, हिरदे ह 
                 चुरत हे।
 दोनो~  मया के जिनगी बिताबो दुनिया ल गोलीमार-2,
                 रंग-रूपे के छन्नी म ये मया ल झन छार-2।
                 ये मया ल झन छार...-6

                                 पवन नेताम 'श्रीबासु'
              सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम(छ.ग.)
                        चलित भाष- 9098766347

शराबी यार मेरे..

यार मेरेsssयार मेरे, मेरे जाने से पहले-2
भरके पैग पिला देनाsssयार मेरे मेरे जाने..
-भोले जी के चरणो मे पहुंचू-2
नशे मे मुझे दफना देना..यार मेरे...

- नागिन धुन -
(नागिन धुन से मोर गांव के घटना याद आथे,गणेश विसर्जन म नागिन धुन म ऊही आदमी नाचथे जेन पिये रहिथे।हा..नागिन धुन बजत देरी हे तहा ले देख सपेरा मनके भीड़ ल, ऊमन ल का हे धुन तो केसियो वाले ल बजाना हे।अतका झन रूमाल धरके बीन बजाही कि नागिन कन्फ्यूज हो जथे कोन ल चाबव कोन ल बचावव।
मोर गांव म एक नागिन अऊ 10-12सपेरा नागिन उठबे न करे सिर्फ घुंडये। मै कान मेर जाके पुछेव नागिन तै कोनो ल काटबे के नही कि घुलंडते रहिबे। त ओ काहये 10-12 झन सपेरा हे एती के मन काटहू त ओती के मन कान म बीन ल टेकाही अऊ ओती...तेखर ले मोलि घुंडन दे। मै कहेव नांगमणी ल तोर हाथ म लाके धरा दव का।)

तो नशा म मोला दफनान काबर पी के जाहू ऊपर त मोला कोनो देवता नई राखय (भूत परेत चुड़ैल)सिवाय भोले के अनाथो के नाथ। कैलाश ही काबर जाबे काबर कि ऊहा मरे के बाद भी पिये ल मिलते राहय)

-भोले जी के चरणो मे पहुंचू-2
नशे मे मुझे दफना देना..यार मेरे...

(1) शराब की खुश्बू निकले जनाजा-2
      एक एक पैग बटवा देना.. यार...
(शांति करे बर आखिरी म उड़िद दाल अऊ घी डालथे त मोर म का डालहू, चखना अऊ दारू ल फेट के मुड़ी डाहर डालना मुड़ी डाहर। पच लकड़ियां डालथे न छेना काये करहू छेना ल यार काये करहूँ ओखर बदला दारू ल ओ हूम देथे नही वईसने चार चार बूंद...)

(2) गंगा जल नही सिर्फ शराब से-2
         रगड़ रगड़ नहवा देना...यार..
( मै कहेव कि तोर खाये बर मतलब काही बर तरसत मत करके खाये पिये बर एक थारी एक गिलास रख देहूं। नही तोला का लगथे मरे के बाद मै खाहूँ अहा! एक बोतल नं.1 के अऊ दू डिस्पोजल एक चखना काफी हे यार। मै - बोतल एक चखना एक पर डिस्पोजल काबर दू! त ओ कहिथे हमन एक झन कहा पिथन कम से कम तो दू झन पिथन काबर हमन पक्का भाईचारा के भावना रखथन।

2) गंगा जल नही सिर्फ शराब से-2
      रगड़ रगड़ नहवा देना...यार मेरे...

                         पवन नेताम'श्रीबासु'
        सिल्हाटी, स/लोहारा,कबीरधाम(छ.ग.)

गणेश वंदना

देह तोर देव बदना, हाथी सिर हे न्यारी-2
गणपति महराज, तोर महिमा हे भारी-4

(1) संकट म देवता ह तोला पुकारे,
        बिगड़े कारज ल फेर तै सवारे।
~    फेर तै सवारे जी फेर तै सवारे..बिगड़े...
-     तैतिस कोटि देवता के तै हा जी स्वामी..
         कलजुग म घलो पुजय नर नारी,
         गणपति महराज, तोर महिमा हे भारी

(2) गौरी के ललना, माता के दुलारे,
         दाई के आज्ञाकारी, बने रखवारे।
~     बने रखवारे जी बने रखवारे.. दाई...
-     आगे ददा भोले क्रोधी तन धारी...
         नइ माने बाते त्रिशूल गला दे कटारी,
         गणपति महराज, तोर महिमा हे भारी

                        पवन नेताम 'श्रीबासु'
    सिल्हाटी, स/लोहारा, कबीरधाम(छ.ग.)