गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

मोर संगी उदास हे

का होगे कोन ल पुछंव मैहा मोर संगी कइसे उदास हे ।
हंसे न बोले हले न डोले मुर्ती पखरा के चुप चाप हे ।।

आंखी के कजरा बनके आंसू छछले हे दुनो गाल मे ।
चेहरा हंथेली मे अइसे फबे जइसे रामायण रहाल मे ।।
कइसे पढंव मोला लागत हे भरे पीरा येकर हर बात मे ।
का होगे कोन ल पुछंव

बिखरे हे केंश दुनो खांध मे जइसे घटा घनघोर हे ।
ग्रहण धरे हे मोर चंदा ल रोवथे देख चकोर रे ।।
आंखी निटोर थक हारगेंव पुन्नी के अमावस रात हे ।
का होगे कोन ल पुछंव

दुख के बदरा

दुख के बदरा मार घपटे सुख के सुरुज मूंदागे रे ।
चँदा ल चकोर ह खोजे पिरित के पाँव छंदागे रे ।।

पिरित परेवना उडी उडी जाये मयारु के अटरिया ।
थई थई बान मारे छतिया ल हाय रे बैरी बहेलिया ।।
कुँवर करेजा होगे छलनी आंखी ले आंसु बोहाथे रे ।
चँदा ल चकोर ह खोजे

पिरित के रोग हे बड अलकरहा घुट घुट परथे जीना ।
अपने लहू ल परथे संगी भर चुरवा मे पीना ।।
मनके आगी तन ल भुंजे होरा कस भुंजागे रे ।
चँदा ल चकोर ह खोजे

कोयली गाए राग भैरवी मैना मल्हार सुनाये ।
झिंगूर बोले बिरहा के बोली जोगनी रतिहा डराये ।।
मया मयारु के गोठ ल सुनके विष अमृत बन जाथे रे ।
चँदा ल चकोर ह खोजे

कभू तो सुनते

कमू तो सुनते कभू तो तोला मन के बात कहि लेतेंव ।
मन कहिथे तै सरग के परी होते रम्भा ,मेनका ।
ईन्द्र सभा मे झुलत रतेंव तोर कान के बनके झुमका ।।
तहिं बनते मोर बाजा गाजा तहिं राग छत्तीसा ।
मालकौश अउ सदा सुहागीन भैरवी कस तोला गा लेतेंव ।
कमू तो सुनते कभू तो तोला मन के बात कहि लेतेंव ।
चंदा के तै होते चंदैनी फुल मे रात के रानी ।
बीजा होते धतूरा के या होते मंऊहा के पानी ।।
मै मिरगा कस भटकत रहितेंव तै होते कस्तूरी ।
तै चंदन के पेढ मै बन के साँप लपेटे रहितेंव ।।
कमू तो सुनते कभू तो तोला मन के बात कहि लेतेंव ।

जोगिया

कहाँ लुकागे तै जोगीया बिन तोर जिंनगी ये बिरान हे ।
कहाँ खोजंव कहाँ देखंव गली पिरित के सुनसान हे ।।

कभू सपना बनके जगाए तै कभू बन के आंसु रोवाए तै ।
सुरता तोरे शूल के पिरा जिव लेवा लेथे परान रे ।।
कहाँ लुकागे तै जोगीया

हर सांस मे येही आश हे हर आश कहे मोर पास हे ।
भोरहा लगे तोर आये के कोन रात हे का बिहान हे ।।
कहाँ लुकागे तै जोगीया

राम राम के बेरा

राम राम के बेरा हे मोर "रमा" के सुरता के घेरा हे ।
मया मे बंधाये मन जोगीया मयारु के लगाथे फेरा रे ।।
दिया बरोबर मांथा के टिकली तन मंदिर ल करे अंजोर ।
मांग के सेंदुर दग दग चमकय जइसे सुरुज भोर ।।
रुप अनुप चमकत हे सुग्घर जइसे आरती के बेरा हे ।
मया मे बंधाये मन जोगीया मयारु के लगाथे फेरा रे ।।
हंसे त ठिंन ठिंन घंटी बजे मज्जिद म होये अजान ।
पंडित के ये गीता लागे मौलवी के लागे कुरआन ।।
तोरन कस अंचरा ह ऊडे पंछी ह छोडे बसेरा ।
मया मे बंधाये मन जोगीया मयारु के लगाथे फेरा रे ।।
बोली गुरतुर हिरदे ल छुवे जस दोहा चौपाई ।
कबीर के सखी मीरा के पद उर्दू के हे रुबाई ।।
पोथी कस गठिया के धर लेंव हिरदे के मै पठेरा ।
मया मे बंधाये मन जोगीया मयारु के लगाथे फेरा रे ।।

उनको दिल मे सजाते रहे

हम थे की उनको दिल में सजाते रहे,
यादो को तेरे हरपल गुनगुनाते रहे|
खुश रहे तू बस यही तमन्ना लिए फिरते है,
और वो हमे पागल बताते रहे।
हम पागल ही सही तेरे लिए
जो हरपल हमे अजमाते रहे,
जब प्यार नही हमसे तो फिर क्यों हमारे जनाजे को अपने जिंदगी बताते रहे।
हम थे की उनको दिल में सजाते रहे,
यादो को तेरे हरपल गुनगुनाते रहे|
और वो हमे पागल बताते रहे।।

मन के बात

मन के बात ल मन मे राखबे
मन के होथे मरना ।
मन हा रोथे मन हा कलपथे मन ला परथे रे कहना ।।
मन कहिथे तै होते रामायण तोला मै पढ लेतेंव ।
मीरा कस तोला भजत भजत जहर प्याला पी लेतेंव ।।
मन कहिथे कहूँ होते तैं गंगा पाप के मोर हरईय्या ।
मरे के बेरा तोला गीता बरोबर सुमर सुमर सुन�लेतेंव ।।
000000
मंदिर के तै देबी बनते तोर चरण के बनतेव फुलवा ।
मन�कहिथे मै होतेंव चौंरा ते तुलसी के बिरवा ।।
सदा सुहागन रहिके कुँवारी बिष्णु प्रिया कहाते ।
गुड़ घीं के बन के हूंम तोर आगु म गुंगवात रहितेंव ।।
00000000

तोर मुड

अलकरहा तोर मुड गोरी रीसा जाथस रे।
एक कनिक मा हांसथस,कउवाथस रे।।

मोरनी कस चाल गोरी लचके कमरिया रे।
कट कट ले भरे नशा  काटत उमरिया रे।।

जेती रेंगे गिरावत रेंगे तैंहर  बिजलिया रे।
तोला निहारत रहिथे धुर्रा संग भींया रे।।

तोर चुंदी हर उड़ावत रहिथे जी फुर फुर।
तोला टुरा मन निहारत रहिथे घूर घूर।।

तोर देह मा लिपट जाते बन के गर्रा रे।
तोर बिन संगी जीवन हे हमर अर्रा रे।।

जेती पलटे ओही अंग आगी लगाथस रे।
अलकरहा तोर मूड गोरी रीसा जाथस रे।।

कहर महर हो जाथे रे टुरी गली खोल।
ताकत रहिथे सुने बर जमो तोर बोल ।।

तोर सूघरइ गजब तै गजब दिखथस रे।
तोला देख नई होवए कोनो टस मस रे।।

होंठ के मुंहरंगी देख जमो चिचियाथे रे।
चीरइ चुरगुन फूल नदी तोला चाहथे रे।।

चुहुर परत हे  तोरेच नाव के चारो मुड़ा।
कभू खोपा मारथस कभू खोंचथस जुड़ा।।

तोर सेंडिल हर घलो करथे टक टक रे।
तोर सुरता हर खावत हे हबक हबक रे।।

किताब ल धरे तैहर कालेज बर जाथस रे।
अलकरहा तोर मुड़ गोरी रिसा जाथस रे।।

बुधवार, 7 दिसंबर 2016

रिसा जाथस रे

अलकरहा तोर मुड गोरी रीसा जाथस रे।
एक कनिक मा हांसथस,कउवाथस रे।।

मोरनी कस चाल गोरी लचके कमरिया रे।
कट कट ले भरे नशा  काटत उमरिया रे।।

जेती रेंगे गिरावत रेंगे तैंहर  बिजलिया रे।
तोला निहारत रहिथे धुर्रा संग भींया रे।।

तोर चुंदी हर उड़ावत रहिथे जी फुर फुर।
तोला टुरा मन निहारत रहिथे घूर घूर।।

तोर देह मा लिपट जाते बन के गर्रा रे।
तोर बिन संगी जीवन हे हमर अर्रा रे।।

जेती पलटे ओही अंग आगी लगाथस रे।
अलकरहा तोर मूड गोरी रीसा जाथस रे।।

कहर महर हो जाथे रे टुरी गली खोल।
ताकत रहिथे सुने बर जमो तोर बोल ।।

तोर सूघरइ गजब तै गजब दिखथस रे।
तोला देख नई होवए कोनो टस मस रे।।

होंठ के मुंहरंगी देख जमो चिचियाथे रे।
चीरइ चुरगुन फूल नदी तोला चाहथे रे।।

चुहुर परत हे  तोरेच नाव के चारो मुड़ा।
कभू खोपा मारथस कभू खोंचथस जुड़ा।।

तोर सेंडिल हर घलो करथे टक टक रे।
तोर सुरता हर खावत हे हबक हबक रे।।

किताब ल धरे तैहर कालेज बर जाथस रे।
अलकरहा तोर मुड़ गोरी रिसा जाथस रे।।

बेवफाई

बेवफाई कर के वो कफन दे गई,
जीते जी वो  तो  दफन दे गई।।

दौलत ने बदल दी फितरत को,
वो बेदर्दी गम का वजन दे गई।

सिला महोब्बत का मिला ऐसा,
दर्द से तड़पता हुआ मन दे गई।

लोग कहते है बदल लो चाहत को,
क्या बदले वो इतना तपन दे गई।

सिलसिला प्यार का खत्म नही।
आशिकी का इतना लगन दे गई।

वो खुश है  बहुत यार बदलकर,
इधर वो आंसुओ का धन दे गई।

खबर उसको मौत का क्या बताएं,
चोंट उसका मौत सा असर दे गई।

जी रहे है वो अब भी बड़े शान से,
इधर रुकता  हुआ धड़कन दे गई।

फेशन

*फेशन*

पीठ ऊघरा जाली दार अंगरखा हे।
कति के फेशन अउ कतेक मजा हे।।

वाह रे जिंस छोलाए डिजाइन मा।
टुरा मर गे फेशन के स्टाइल मा।।

बड़का बड़का चुंदी समझे मिथुन रे।
टकला डिजाइन मारे कतको कुन रे।।

कोनो चुंदी ल भूरवा करवाए हे।
कोनो कोनो सादा लगवाए हे।।

वाह रे डीजाइन देखत फिलिम ल।
मुंह ला धोवत  पोतत किरीम ल।।

कोनो हरदी ल चुपरे  कोनो माटी।
कोनो बस्सावत अंडा देवत आंटी।।

कोनो ओरमाए घेंच म मफलर ल।
टुरा गोठियावत हिंदी बटलर ल।।

कोनो छेदवाए कान पहिरे बाली।
काम बुता ल छोड़ घूमए खाली।।

कोनो सोन के सांकर ओरमाए हे।
कोनो हांथ मा चूड़ा ल लगाए हे।।

कोनो टेटू कोनो गोदना गोदवाए हे।
बड़का नाग ल भुजा मा छपवाए हे।।

सुग्घर आँखि ल तस्मा म बीगाड़े रे।
सुग्घर चूंदी मा  टोपी  हर माढ़े रे।।

शनिवार, 3 दिसंबर 2016

@@@

जो अपने हुस्न पे कुछ जादा ही गुरुर करते है

उनको एक बुरी खबर देता हु
की इंतजार मेरा अब कईईई  और भी करते है

नई नवेली लड़कियो की क्या बात करू

ऐसी गलती तो अब सादी सुदा भी करते है

😀😁
तेरे वादों को अब भी महफ़ूज़ रखता है ये दिल,
तेरा दिल दुखाना ,रगों में छलकता रहेगा ।

बिक्कट के मया

बिक्कट के मया

बिक्कट के मया हे
नइ छोडव तोला
तोरबर मयारू मोर
तरसत हे चोला।।

तोर मीठ बोली मोर
जीव के अधारा
तही मोर हिरदे के
नारा बेयारा ।।

तोर बीना जोही रे
जीव मोर अंधियारा
आजा न जिनगी म
कर दे उजियारा।।

चंदा,सुरूज ले
हवे भले दुरिहा
तै मोर जोगनी
तही मोर जहूरिया ।।

मुच मुच ले हॅसी म
मन ल सजा डारे
रंग रंग के गहना म
तन ल रंगा डारे।।

मया के डोरी म
बांधे तै मोला
हाय मन मोहनी रे
मोर बम के गोला।।

बिक्कट के मया हे
नइ छोडव तोला
तोर बर मयारू मोर
तरसत हे चोला।।