दुख के बदरा मार घपटे सुख के सुरुज मूंदागे रे ।
चँदा ल चकोर ह खोजे पिरित के पाँव छंदागे रे ।।
पिरित परेवना उडी उडी जाये मयारु के अटरिया ।
थई थई बान मारे छतिया ल हाय रे बैरी बहेलिया ।।
कुँवर करेजा होगे छलनी आंखी ले आंसु बोहाथे रे ।
चँदा ल चकोर ह खोजे
पिरित के रोग हे बड अलकरहा घुट घुट परथे जीना ।
अपने लहू ल परथे संगी भर चुरवा मे पीना ।।
मनके आगी तन ल भुंजे होरा कस भुंजागे रे ।
चँदा ल चकोर ह खोजे
कोयली गाए राग भैरवी मैना मल्हार सुनाये ।
झिंगूर बोले बिरहा के बोली जोगनी रतिहा डराये ।।
मया मयारु के गोठ ल सुनके विष अमृत बन जाथे रे ।
चँदा ल चकोर ह खोजे
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