बुधवार, 7 दिसंबर 2016

रिसा जाथस रे

अलकरहा तोर मुड गोरी रीसा जाथस रे।
एक कनिक मा हांसथस,कउवाथस रे।।

मोरनी कस चाल गोरी लचके कमरिया रे।
कट कट ले भरे नशा  काटत उमरिया रे।।

जेती रेंगे गिरावत रेंगे तैंहर  बिजलिया रे।
तोला निहारत रहिथे धुर्रा संग भींया रे।।

तोर चुंदी हर उड़ावत रहिथे जी फुर फुर।
तोला टुरा मन निहारत रहिथे घूर घूर।।

तोर देह मा लिपट जाते बन के गर्रा रे।
तोर बिन संगी जीवन हे हमर अर्रा रे।।

जेती पलटे ओही अंग आगी लगाथस रे।
अलकरहा तोर मूड गोरी रीसा जाथस रे।।

कहर महर हो जाथे रे टुरी गली खोल।
ताकत रहिथे सुने बर जमो तोर बोल ।।

तोर सूघरइ गजब तै गजब दिखथस रे।
तोला देख नई होवए कोनो टस मस रे।।

होंठ के मुंहरंगी देख जमो चिचियाथे रे।
चीरइ चुरगुन फूल नदी तोला चाहथे रे।।

चुहुर परत हे  तोरेच नाव के चारो मुड़ा।
कभू खोपा मारथस कभू खोंचथस जुड़ा।।

तोर सेंडिल हर घलो करथे टक टक रे।
तोर सुरता हर खावत हे हबक हबक रे।।

किताब ल धरे तैहर कालेज बर जाथस रे।
अलकरहा तोर मुड़ गोरी रिसा जाथस रे।।

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