गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

कभू तो सुनते

कमू तो सुनते कभू तो तोला मन के बात कहि लेतेंव ।
मन कहिथे तै सरग के परी होते रम्भा ,मेनका ।
ईन्द्र सभा मे झुलत रतेंव तोर कान के बनके झुमका ।।
तहिं बनते मोर बाजा गाजा तहिं राग छत्तीसा ।
मालकौश अउ सदा सुहागीन भैरवी कस तोला गा लेतेंव ।
कमू तो सुनते कभू तो तोला मन के बात कहि लेतेंव ।
चंदा के तै होते चंदैनी फुल मे रात के रानी ।
बीजा होते धतूरा के या होते मंऊहा के पानी ।।
मै मिरगा कस भटकत रहितेंव तै होते कस्तूरी ।
तै चंदन के पेढ मै बन के साँप लपेटे रहितेंव ।।
कमू तो सुनते कभू तो तोला मन के बात कहि लेतेंव ।

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