कमू तो सुनते कभू तो तोला मन के बात कहि लेतेंव ।
मन कहिथे तै सरग के परी होते रम्भा ,मेनका ।
ईन्द्र सभा मे झुलत रतेंव तोर कान के बनके झुमका ।।
तहिं बनते मोर बाजा गाजा तहिं राग छत्तीसा ।
मालकौश अउ सदा सुहागीन भैरवी कस तोला गा लेतेंव ।
कमू तो सुनते कभू तो तोला मन के बात कहि लेतेंव ।
चंदा के तै होते चंदैनी फुल मे रात के रानी ।
बीजा होते धतूरा के या होते मंऊहा के पानी ।।
मै मिरगा कस भटकत रहितेंव तै होते कस्तूरी ।
तै चंदन के पेढ मै बन के साँप लपेटे रहितेंव ।।
कमू तो सुनते कभू तो तोला मन के बात कहि लेतेंव ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें