शनिवार, 3 दिसंबर 2016

बिक्कट के मया

बिक्कट के मया

बिक्कट के मया हे
नइ छोडव तोला
तोरबर मयारू मोर
तरसत हे चोला।।

तोर मीठ बोली मोर
जीव के अधारा
तही मोर हिरदे के
नारा बेयारा ।।

तोर बीना जोही रे
जीव मोर अंधियारा
आजा न जिनगी म
कर दे उजियारा।।

चंदा,सुरूज ले
हवे भले दुरिहा
तै मोर जोगनी
तही मोर जहूरिया ।।

मुच मुच ले हॅसी म
मन ल सजा डारे
रंग रंग के गहना म
तन ल रंगा डारे।।

मया के डोरी म
बांधे तै मोला
हाय मन मोहनी रे
मोर बम के गोला।।

बिक्कट के मया हे
नइ छोडव तोला
तोर बर मयारू मोर
तरसत हे चोला।।

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