सोमवार, 28 नवंबर 2016

तब तब गाँधी आथे रे

जब जब ये धरती दांव लगे ।
नरक कस गली गाँव लगे ।
बैरी मन देख गुर्राथे रे ।
पापी के पाप बढ जाथे रे ।।
तब तब एक आँधी उडाथे रे ।
तब तब एक गाँधी आथे रे ।।

जब सजा लगे जिंदगानी रे ।
करम छाँडे ये गुलामी रे ।।
मनखे बंधुवा बनिहार लगे ।
तन मन ले सबो बिमार लगे ।।
तब तब एक आँधी उडाथे रे ।
तब तब एक गाँधी आथे रे ।।

जब चारो मुँडा अंधियार लगे ।
जिनगी ह घलो दुस्वार लगे ।।
जब तन के लहु सुख जाथे रे ।
हांथ के लाठी टुट जाथे रे ।।
तब तब एक आँधी उडाथे रे ।
तब तब एक गाँधी आथे रे ।।

जब अजादी के चिरईय्या ल ।
ताकय ये पापी बिलईय्या ह ।।
पंजा म अपन दबोचय रे ।
आखा बाखा ल कोंचय रे ।।
तब तब एक आँधी उडाथे रे ।
तब तब एक गाँधी आथे रे ।।

जब आथे रे बात तिरंगा के ।
गऊ माता गीता गंगा के ।।
कोनो बेटा फाँसी चढ जाथे रे ।
शहिद के नाम जड जाथे रे ।।
तब तब एक आँधी उडाथे रे ।
तब तब एक गाँधी आथे रे ।।

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