तुम्हारा साथ ..
जाने क्यूँ होता है मुझको ये आभास
दूर होकर भी लगते हो तुम तो पास ।
यादें तुम्हारी है अब मधुर मधु -सी
हर लेते हो तुम तो मेरा सब संत्रास ।
तुम्हारा साथ पाकर लगता हो जैसे
जीवन हो गया मेरा बहुत कुछ खास ।
दूर और पास का अंतर हो गया गौण
तुम्हारा जो मिल गया जीवन का साथ ।
तुम्हारा साथ है मेरे लिए सुखद बड़ा
मन में भर देता है नित नये उल्लास ।
मेरा 'सपना' तो हो गया है अब सच
पतझड़ भी बन गया है अब मधुमास ।
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