शनिवार, 26 नवंबर 2016

तुम्हारा साथ

तुम्हारा साथ ..

जाने क्यूँ होता है मुझको ये आभास
दूर होकर भी लगते हो तुम तो पास ।

यादें तुम्हारी है  अब मधुर मधु -सी
हर लेते हो तुम तो मेरा सब संत्रास ।

तुम्हारा साथ पाकर लगता हो जैसे
जीवन हो गया मेरा बहुत कुछ खास ।

दूर और पास का अंतर हो गया गौण
तुम्हारा जो मिल गया जीवन का साथ ।

तुम्हारा साथ है मेरे लिए सुखद बड़ा
मन में भर देता है नित नये उल्लास ।

मेरा 'सपना' तो हो गया है अब सच
पतझड़ भी बन गया है अब मधुमास ।

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