तेरे धवल हृदय पुहूप मे तितली सी बस जाउं ये चाहत है
तेरी महक से सुरभित मै भी हो जाउं ये चाहत है
मांग लू पनाह रब से तेरे मन की बगिया में
रंग बिरंगे सपन तेरे आँचल में देख लूं ये चाहत है..
जिनगी अनमोल हे"*
जब तक ए मानुस तन चोला हे,
जिनगी ल बने सुग्हर असन जि ले!
काली क हो जहि तेकर काहे ठिकाना,
बेरा के संगे संग जिनगी ल हांसी ठिठोली जि ले!
आँसू ख़ुशी के हों या गम के बहने दो ।
तेरे यादों को मेरे संग में रहने दो ।
अगर बेवफाई है तो प्यार नहीं
वफ़ा है तो एहसास को कहने दो ।
मैं कागज़ हो जाऊ,तू कलम हो जाये।
मैं मंजिल हो जाऊ,तू कदम हो जाये।
मैं, मैं ना रहूँ , तुम, तुम ना रहो,
आओ मिल जाये,दोनों हम हो जाये।
मुर्दा हो चुकी बस्ती से..
जिंदगी की खुशबू आ रही हैं,
वो देखो......मेरे देश में...
एक बार फिर कहीं
सोने की चिड़िया चहचहा रही हैं..
तुम पे नजरें गड़ी हैं,तमाम की
ऐसी खूबसूरती भी किस काम की।।
जिसमे शिरकत न हो जाम की
वह महफिल किस काम की।।
माना चर्चा है,चारो तरफ तेरे नाम की
पर तेरे साथ मेरा नाम न जुड़े
ऐसी चर्चा मेरे किस काम की।।
*ऐ परिंदे!!*
*यूँ ज़मीं पर बैठकर क्यों*
*आसमान देखता है..*
*पंखों को खोल, क्योंकि,*
ज़माना सिर्फ़ उड़ान देखता है !!
*लहरों की तो फ़ितरत ही है*
*शोर मचाने की..*
*लेकिन मंज़िल उसी की होती है,
जो नज़रों से तूफ़ान* *देखता है !!*
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें