बुधवार, 23 नवंबर 2016

मुक्तक संग्रह

(1) मुर्दा हो चुकी बस्ती से........... जिंदगी
      की  खुशबू आ रही हैं,
      वो देखो......मेरे देश में.....एक बार फिर कहीं 
      सोने की चिड़िया चहचहा रही हैं.....

(2) अक्श दिखा है आइने में आज फिर उनका ।
       नक्शे कदम पर चलने की बारी हमारी है ।।

                    
(3) हवाओं ने रूख बदला आज फिर से ।
      न जाने आज फिर किसकी बारी है ।।

 (4) पता है मुझे, तेरे बिना ही जीनी है सारी।    
       जिंदगी,
       मग़र दिल को तेरे लौट आने का ऐतबार सा 
       क्यूँ है।💕

(5) महसूस कर रहे हैं तेरी लापरवाही कुछ दिनों
     से, याद रखना अगर हम बदल गये तो मनाना 
     तेरे बस की बात नही..

(6) आँखें भिगोने लगी है अब तेरी बातें,*

    *काश तुम अजनबी ही रहते तो अच्छा होता,,,

(7)भूलना भी एक नेमत है खुदा की,
     वरना इंसान को पागल करदे यादें।💕

(8) मुद्दतो बाद वो मिली भी तो बैंक में,

      बताओ मोहब्बत करते कि .......... नोट। 
      बदलते।।

(9) तेरे धवल हृदय पुहूप मे तितली सी बस जाउं 
      ये चाहत है

      तेरी महक से सुरभित मै भी हो जाउं ये चाहत 
      है
     मांग लू पनाह रब से तेरे मन की बगिया में

      रंग बिरंगे सपन तेरे आँचल में देख लूं ये 
      चाहत।है..

(10) हम दुनिया को दिखाने के लिए,
        नए नए रंग क्यों धरते है,

        सच्चाई से तो सब वाकिफ है,
        फिर हम औपचारिकताये क्यों करते। 
        है,            
(11) कैसी बातें करते हो साहब मैं लफ़्ज़ों से भी
        ना खेलूँ ,

        ज़माना तो दिलों से खेलता है...

(12) अगर वो याद नहीं करते तो आप कर 
        लीजिये,
        रिश्तें निभाते वक्त मुकाबला नहीं किया 
        जाता !!

(13) जिन्दगी में ऐसे शख्स को कभी मत खोना,
        जिसके दिल में तुम्हारे लिए इज्जत, फिकर।
        और मोहब्बत हो !!

(14) उन्हे हम याद आते है मगर फुर्सत के लम्हों 
        में,
        मगर ये बात भी सच है की उन्हे फुर्सत नहीं 
        मिलती..

(15) मेरी यही आदत तुम सब को सदा याद 
        रहेगी-..
       न शिकवा, न कोई गिला;..
       जब भी मिला, मुस्कुरा के मिला....
(16) मोहब्बत की दास्ताँ लिखने का हुनर तो आ 
        गया,
       पर महबूब को मनाने में, अब भी नाकाम  
       हूँ मैं..
(17) हमें लिखकर कहीं महफूज़ कर*
        लीजिए*
       तुम्हारी याददाश्त से निकलते*
       जा रहे हैं हम....
(18) हम उनकी तस्वीरों को छुप छुप के सजाया 
        करते है...
        कभी रखते हैं इन आँखों में, कभी दिल में  
        बसाया करते हैं..
(19) जिन्दगी में ऐसे शख्स को कभी मत खोना,
        जिसके दिल में तुम्हारे लिए इज्जत, फिकर 
       और मोहब्बत हो !!

(20) कैसी बातें करते हो साहब मैं लफ़्ज़ों से भी 
        ना खेलूँ ,

       ज़माना तो दिलों से खेलता है...
(21) ना मुमकिन है इसको समझना ®
        दिल का अपना ही मिज़ाज़ होता है..!!

(22) भूलना भी एक नेमत है खुदा की,
        वरना इंसान को पागल करदे यादें।

(23) आँखें भिगोने लगी है अब तेरी बातें,*
        काश तुम अजनबी ही रहते तो अच्छा   
         होता,,
(24) रिश्ता तोडना मेरी फितरत में नहीं,
        हम तो बदनाम है रिश्ता निभाने के लिये !!

(25) हवाओं ने रूख बदला आज फिर से ।
       न जाने आज फिर किसकी बारी है ।।

(26) सवाल ये नहीं रफ्तार किसकी कितनी है ...*

        सवाल  ये  है  सलीक़े से  कौन चलता।  
         है...!!

(27) कभी ना कहो कि, दिन अपने खराब है,,*
        समझ लो कि हम कांटो से घिरे हुए गुलाब है

(28) बेहिसाब यादें हैं उन बीते लम्हों की,..

         एक भूलने निकलूँ तो, सौ जहन में। 
         आतीहैं..

(29) सब कुछ मिल जाए तो जीने का क्या मज़ा,,

        जीने के लिए एक की कमी भी
         जरूरी है।।

(30) सिर्फ बिछड़ जाने से मोहब्बत खतम
         नहीं होता

         यादे भी तो होती हे *रुलाने* के लिए...

(31)  लहज़ा - ए - यार में ज़हर है,
         बिच्छू की तरह,
        वो मुझे आप तो कहता है,
         मगर तू की तरह...

(32) मोहब्बत भी ईतनी शीद्दत से करो
        कि, "वो धोखा दे कर भी सोचे के
         वापस जाऊ तो किस मुंह से जाऊ.. !

(33)  एक अच्छा सा दे दो उन्हें भी कोई गोल्ड।   
         मैडल...
          वो अच्छा खेल गए है
           मेरी ज़िन्दगी के साथ...
(34)  आईना ये बताये
         कैसा है चेहरा तुम्हारा
         कहां कहां लगे है दाग
          कहां खूबसूरती का नजारा.
(35)

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