*गोंदा फूल*
बड़ सुग्घर दिखथे गोंदा फूल,
लगथे हांसत हवए खुलखुल।
आनी बानी किसिम किसिम,
पिवरा लाली कत्था झूले झूल।
कोनो हर खोंचे रहिथे बेनी मा,
मनमोहा जाथे देखते घुलघुल।
नेता मंत्री के करथे तो सुवागत,
तर जाथे माला पहीर के कुल।
चौरा के गोंदा रसिया चलिस,
सुघर गीत ल नई सकच भूल।
मया करके दे देबे कोनो ला,
लग जाही फेर मया के हूल।
लइका मन ला गरूजी ह कथे,
जयंती बर लाहा खोज बुल।
बर कइना हर घलो पहिराथे,
गोंदा फूल पहिर रथे मिल जुल।
🙏🏻राजकिशोर धिरही🙏🏻
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