गुरुवार, 24 नवंबर 2016

तेरी रूप,तेरी चाह

तेरी नजर से मेरी नजर का तकरार हो गया।
मेरे दिल को तुझ पर ऐतबार हो गया।
क्या ? जादू चलाई तुने नजर से,
कि, एक ही नजर मे प्यार हो गया...।।

ये होठ नही शराब की दरिया है।
जिसे देखते ही होश उड़ा जाती है।
जिसे पाते ही मदहोश हो जाती है।
उस दरिया मे डूबने के बाद,
मेरी प्यास बुझा जाती है..।।

तेरी नशीली होठ कहती है
आ छू ले मुझे...।
तेरी आँखे कहती आ पल्को पे
बिठा लू तुझे...।

तेरे धड़कते हुए दिल,
तेरी काली घटा सी बाल,
तेरे तप्त अंगार सी गाल,
तेरी चमकती हुई कानो की बाली,
ढलती पठार सा तुम्हारा वक्ष स्थल,
खंभ सी तुम्हारी ग्रीवा,
सहम ती हुई तेरी आशाए,
बिजली सी कड़कती तुम्हारी बदन,
तलाशती प्यार की निगाहे,
समेट लेने की तेरी चाह मुझे..।
ये सब पुकारती है मुझे
ये सब पुकारती मुझे...।।

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