*पीड़हा*
तइहा जमाना मा कहां पाते खुरसी।
पीड़हा मा बईठ आगी तापे गोरसी।।
पीड़हा म बइठ के तो खावए भात।
अब आगे चलन ड्रेसिंग टेबल साथ।।
पहुना आते साट पीड़हा मंगवाए।
भर भर लोटा पहुना बर लाए।।
पीड़हा के अब ले चलन चलत हे।
लादा वाला बईठ ओनहा धोवत हे।।
पीड़हा दे के जम्मो घर करए मान।
पीड़हा बीन तो समझए अपमान।।
पीड़हा हर रहिथे पूजा चउका मा।
पीड़हा पाए बइठे मजा ठउका मा।।
पीड़हा बनवाए नीमरा लकरी के।
साल सैगोन मउहा बम्बरी के।।
मड़वा बर पीड़हा बनाए बढ़हई।
पीड़हा मा बइठ के कटे पीरा भाई।।
पवन नेताम
राजकिशोर धिरही
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