गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

मोर संगी उदास हे

का होगे कोन ल पुछंव मैहा मोर संगी कइसे उदास हे ।
हंसे न बोले हले न डोले मुर्ती पखरा के चुप चाप हे ।।

आंखी के कजरा बनके आंसू छछले हे दुनो गाल मे ।
चेहरा हंथेली मे अइसे फबे जइसे रामायण रहाल मे ।।
कइसे पढंव मोला लागत हे भरे पीरा येकर हर बात मे ।
का होगे कोन ल पुछंव

बिखरे हे केंश दुनो खांध मे जइसे घटा घनघोर हे ।
ग्रहण धरे हे मोर चंदा ल रोवथे देख चकोर रे ।।
आंखी निटोर थक हारगेंव पुन्नी के अमावस रात हे ।
का होगे कोन ल पुछंव

दुख के बदरा

दुख के बदरा मार घपटे सुख के सुरुज मूंदागे रे ।
चँदा ल चकोर ह खोजे पिरित के पाँव छंदागे रे ।।

पिरित परेवना उडी उडी जाये मयारु के अटरिया ।
थई थई बान मारे छतिया ल हाय रे बैरी बहेलिया ।।
कुँवर करेजा होगे छलनी आंखी ले आंसु बोहाथे रे ।
चँदा ल चकोर ह खोजे

पिरित के रोग हे बड अलकरहा घुट घुट परथे जीना ।
अपने लहू ल परथे संगी भर चुरवा मे पीना ।।
मनके आगी तन ल भुंजे होरा कस भुंजागे रे ।
चँदा ल चकोर ह खोजे

कोयली गाए राग भैरवी मैना मल्हार सुनाये ।
झिंगूर बोले बिरहा के बोली जोगनी रतिहा डराये ।।
मया मयारु के गोठ ल सुनके विष अमृत बन जाथे रे ।
चँदा ल चकोर ह खोजे

कभू तो सुनते

कमू तो सुनते कभू तो तोला मन के बात कहि लेतेंव ।
मन कहिथे तै सरग के परी होते रम्भा ,मेनका ।
ईन्द्र सभा मे झुलत रतेंव तोर कान के बनके झुमका ।।
तहिं बनते मोर बाजा गाजा तहिं राग छत्तीसा ।
मालकौश अउ सदा सुहागीन भैरवी कस तोला गा लेतेंव ।
कमू तो सुनते कभू तो तोला मन के बात कहि लेतेंव ।
चंदा के तै होते चंदैनी फुल मे रात के रानी ।
बीजा होते धतूरा के या होते मंऊहा के पानी ।।
मै मिरगा कस भटकत रहितेंव तै होते कस्तूरी ।
तै चंदन के पेढ मै बन के साँप लपेटे रहितेंव ।।
कमू तो सुनते कभू तो तोला मन के बात कहि लेतेंव ।

जोगिया

कहाँ लुकागे तै जोगीया बिन तोर जिंनगी ये बिरान हे ।
कहाँ खोजंव कहाँ देखंव गली पिरित के सुनसान हे ।।

कभू सपना बनके जगाए तै कभू बन के आंसु रोवाए तै ।
सुरता तोरे शूल के पिरा जिव लेवा लेथे परान रे ।।
कहाँ लुकागे तै जोगीया

हर सांस मे येही आश हे हर आश कहे मोर पास हे ।
भोरहा लगे तोर आये के कोन रात हे का बिहान हे ।।
कहाँ लुकागे तै जोगीया

राम राम के बेरा

राम राम के बेरा हे मोर "रमा" के सुरता के घेरा हे ।
मया मे बंधाये मन जोगीया मयारु के लगाथे फेरा रे ।।
दिया बरोबर मांथा के टिकली तन मंदिर ल करे अंजोर ।
मांग के सेंदुर दग दग चमकय जइसे सुरुज भोर ।।
रुप अनुप चमकत हे सुग्घर जइसे आरती के बेरा हे ।
मया मे बंधाये मन जोगीया मयारु के लगाथे फेरा रे ।।
हंसे त ठिंन ठिंन घंटी बजे मज्जिद म होये अजान ।
पंडित के ये गीता लागे मौलवी के लागे कुरआन ।।
तोरन कस अंचरा ह ऊडे पंछी ह छोडे बसेरा ।
मया मे बंधाये मन जोगीया मयारु के लगाथे फेरा रे ।।
बोली गुरतुर हिरदे ल छुवे जस दोहा चौपाई ।
कबीर के सखी मीरा के पद उर्दू के हे रुबाई ।।
पोथी कस गठिया के धर लेंव हिरदे के मै पठेरा ।
मया मे बंधाये मन जोगीया मयारु के लगाथे फेरा रे ।।

उनको दिल मे सजाते रहे

हम थे की उनको दिल में सजाते रहे,
यादो को तेरे हरपल गुनगुनाते रहे|
खुश रहे तू बस यही तमन्ना लिए फिरते है,
और वो हमे पागल बताते रहे।
हम पागल ही सही तेरे लिए
जो हरपल हमे अजमाते रहे,
जब प्यार नही हमसे तो फिर क्यों हमारे जनाजे को अपने जिंदगी बताते रहे।
हम थे की उनको दिल में सजाते रहे,
यादो को तेरे हरपल गुनगुनाते रहे|
और वो हमे पागल बताते रहे।।

मन के बात

मन के बात ल मन मे राखबे
मन के होथे मरना ।
मन हा रोथे मन हा कलपथे मन ला परथे रे कहना ।।
मन कहिथे तै होते रामायण तोला मै पढ लेतेंव ।
मीरा कस तोला भजत भजत जहर प्याला पी लेतेंव ।।
मन कहिथे कहूँ होते तैं गंगा पाप के मोर हरईय्या ।
मरे के बेरा तोला गीता बरोबर सुमर सुमर सुन�लेतेंव ।।
000000
मंदिर के तै देबी बनते तोर चरण के बनतेव फुलवा ।
मन�कहिथे मै होतेंव चौंरा ते तुलसी के बिरवा ।।
सदा सुहागन रहिके कुँवारी बिष्णु प्रिया कहाते ।
गुड़ घीं के बन के हूंम तोर आगु म गुंगवात रहितेंव ।।
00000000

तोर मुड

अलकरहा तोर मुड गोरी रीसा जाथस रे।
एक कनिक मा हांसथस,कउवाथस रे।।

मोरनी कस चाल गोरी लचके कमरिया रे।
कट कट ले भरे नशा  काटत उमरिया रे।।

जेती रेंगे गिरावत रेंगे तैंहर  बिजलिया रे।
तोला निहारत रहिथे धुर्रा संग भींया रे।।

तोर चुंदी हर उड़ावत रहिथे जी फुर फुर।
तोला टुरा मन निहारत रहिथे घूर घूर।।

तोर देह मा लिपट जाते बन के गर्रा रे।
तोर बिन संगी जीवन हे हमर अर्रा रे।।

जेती पलटे ओही अंग आगी लगाथस रे।
अलकरहा तोर मूड गोरी रीसा जाथस रे।।

कहर महर हो जाथे रे टुरी गली खोल।
ताकत रहिथे सुने बर जमो तोर बोल ।।

तोर सूघरइ गजब तै गजब दिखथस रे।
तोला देख नई होवए कोनो टस मस रे।।

होंठ के मुंहरंगी देख जमो चिचियाथे रे।
चीरइ चुरगुन फूल नदी तोला चाहथे रे।।

चुहुर परत हे  तोरेच नाव के चारो मुड़ा।
कभू खोपा मारथस कभू खोंचथस जुड़ा।।

तोर सेंडिल हर घलो करथे टक टक रे।
तोर सुरता हर खावत हे हबक हबक रे।।

किताब ल धरे तैहर कालेज बर जाथस रे।
अलकरहा तोर मुड़ गोरी रिसा जाथस रे।।

बुधवार, 7 दिसंबर 2016

रिसा जाथस रे

अलकरहा तोर मुड गोरी रीसा जाथस रे।
एक कनिक मा हांसथस,कउवाथस रे।।

मोरनी कस चाल गोरी लचके कमरिया रे।
कट कट ले भरे नशा  काटत उमरिया रे।।

जेती रेंगे गिरावत रेंगे तैंहर  बिजलिया रे।
तोला निहारत रहिथे धुर्रा संग भींया रे।।

तोर चुंदी हर उड़ावत रहिथे जी फुर फुर।
तोला टुरा मन निहारत रहिथे घूर घूर।।

तोर देह मा लिपट जाते बन के गर्रा रे।
तोर बिन संगी जीवन हे हमर अर्रा रे।।

जेती पलटे ओही अंग आगी लगाथस रे।
अलकरहा तोर मूड गोरी रीसा जाथस रे।।

कहर महर हो जाथे रे टुरी गली खोल।
ताकत रहिथे सुने बर जमो तोर बोल ।।

तोर सूघरइ गजब तै गजब दिखथस रे।
तोला देख नई होवए कोनो टस मस रे।।

होंठ के मुंहरंगी देख जमो चिचियाथे रे।
चीरइ चुरगुन फूल नदी तोला चाहथे रे।।

चुहुर परत हे  तोरेच नाव के चारो मुड़ा।
कभू खोपा मारथस कभू खोंचथस जुड़ा।।

तोर सेंडिल हर घलो करथे टक टक रे।
तोर सुरता हर खावत हे हबक हबक रे।।

किताब ल धरे तैहर कालेज बर जाथस रे।
अलकरहा तोर मुड़ गोरी रिसा जाथस रे।।

बेवफाई

बेवफाई कर के वो कफन दे गई,
जीते जी वो  तो  दफन दे गई।।

दौलत ने बदल दी फितरत को,
वो बेदर्दी गम का वजन दे गई।

सिला महोब्बत का मिला ऐसा,
दर्द से तड़पता हुआ मन दे गई।

लोग कहते है बदल लो चाहत को,
क्या बदले वो इतना तपन दे गई।

सिलसिला प्यार का खत्म नही।
आशिकी का इतना लगन दे गई।

वो खुश है  बहुत यार बदलकर,
इधर वो आंसुओ का धन दे गई।

खबर उसको मौत का क्या बताएं,
चोंट उसका मौत सा असर दे गई।

जी रहे है वो अब भी बड़े शान से,
इधर रुकता  हुआ धड़कन दे गई।

फेशन

*फेशन*

पीठ ऊघरा जाली दार अंगरखा हे।
कति के फेशन अउ कतेक मजा हे।।

वाह रे जिंस छोलाए डिजाइन मा।
टुरा मर गे फेशन के स्टाइल मा।।

बड़का बड़का चुंदी समझे मिथुन रे।
टकला डिजाइन मारे कतको कुन रे।।

कोनो चुंदी ल भूरवा करवाए हे।
कोनो कोनो सादा लगवाए हे।।

वाह रे डीजाइन देखत फिलिम ल।
मुंह ला धोवत  पोतत किरीम ल।।

कोनो हरदी ल चुपरे  कोनो माटी।
कोनो बस्सावत अंडा देवत आंटी।।

कोनो ओरमाए घेंच म मफलर ल।
टुरा गोठियावत हिंदी बटलर ल।।

कोनो छेदवाए कान पहिरे बाली।
काम बुता ल छोड़ घूमए खाली।।

कोनो सोन के सांकर ओरमाए हे।
कोनो हांथ मा चूड़ा ल लगाए हे।।

कोनो टेटू कोनो गोदना गोदवाए हे।
बड़का नाग ल भुजा मा छपवाए हे।।

सुग्घर आँखि ल तस्मा म बीगाड़े रे।
सुग्घर चूंदी मा  टोपी  हर माढ़े रे।।

शनिवार, 3 दिसंबर 2016

@@@

जो अपने हुस्न पे कुछ जादा ही गुरुर करते है

उनको एक बुरी खबर देता हु
की इंतजार मेरा अब कईईई  और भी करते है

नई नवेली लड़कियो की क्या बात करू

ऐसी गलती तो अब सादी सुदा भी करते है

😀😁
तेरे वादों को अब भी महफ़ूज़ रखता है ये दिल,
तेरा दिल दुखाना ,रगों में छलकता रहेगा ।

बिक्कट के मया

बिक्कट के मया

बिक्कट के मया हे
नइ छोडव तोला
तोरबर मयारू मोर
तरसत हे चोला।।

तोर मीठ बोली मोर
जीव के अधारा
तही मोर हिरदे के
नारा बेयारा ।।

तोर बीना जोही रे
जीव मोर अंधियारा
आजा न जिनगी म
कर दे उजियारा।।

चंदा,सुरूज ले
हवे भले दुरिहा
तै मोर जोगनी
तही मोर जहूरिया ।।

मुच मुच ले हॅसी म
मन ल सजा डारे
रंग रंग के गहना म
तन ल रंगा डारे।।

मया के डोरी म
बांधे तै मोला
हाय मन मोहनी रे
मोर बम के गोला।।

बिक्कट के मया हे
नइ छोडव तोला
तोर बर मयारू मोर
तरसत हे चोला।।

मंगलवार, 29 नवंबर 2016

तोर सुरता

तोर सुरता म निंद न ई आत हे यार
मन लुहूर-तूहूर तोर डाहर दौड़े जा थे यार
का करव कैसे करव समझ न ई आथे यार
आधा रात के तोर सुरता सताथे यार

गज़ल

                      (1)
ज़ुल्म की उनकी कहानी लिख रहा हूं ,
इश्क़ भी है इक ग़ुलामी लिख रहा हूं ।

छोड़ कर जाना था तो क्यूं की मुहब्बत ,
बेवफ़ा की बदगुमानी लिख रहा हूं ।

शांत था मैं, वो सदा बेचैन रहती ,
रिश्ता अपना आग- पानी लिख रहा हूं ।

ज़िन्दगी तो यारों फ़ानी है हमारी ,
मैं मुहब्बत को भी फ़ानी लिख रहा हूं ।

मौत ,कष्टों से दिलाती मुक्ति हमको ,
बेरहम है ज़िन्दगानी लिख रहा हूं ।

दुनिया क्या जाने किसी के दर्द को तो,
अपना ग़म अपनी ज़ुबानी लिख रहा हूं ।

छीन कर सब कुछ मेरा वो जा चुकी है,
फिर भी उसका नाम दानी लिख रहा हूं ।

                         (2)

जागती हैं सोते सोते भी हमारी कल्पनायें,
बेवफ़ाओं ने दिया जो दर्द वो किसको बतायें ।

हम समंदर से मुहब्बत करने वाले लोग हैं तो,
क्यूं किनारों की इबादत में कभी भी सर झुकायें ।

है नहीं आसां किसी का प्यार पाना ज़िन्दगी में ,
आशिक़ी तो ,आसमानी या ख़ुदाई हैं बलाएं ।

गर अमीरी के पहाड़ों पे तुम्हें चढना है यारो,
तो ग़रीबी की ज़मीं को रोज़ ही यारो सतायें ।

गर भरोसा टूटा तो,रिश्तों में आयेंगी दरारें ,
मंदिरों में मस्जिदों में बात ये सबको बतायें ।

ज़िन्दगी के इस सफ़र में ख़ुशियां गर चिढती हैं हमसे,
तो ग़मों के कारवां से दोस्ती क्यूं ना बढायें ।

हम ग़रीबों की मदद करने में हिचके हर समय तो,
ख़ुश ख़ुदा ना होगा चाहे रोज़ ही मस्जिद में जायें ।

सोमवार, 28 नवंबर 2016

राम राम के बेरा

राम राम के बेरा हे मोर "रमा" के सुरता के घेरा हे ।
मया मे बंधाये मन जोगीया मयारु के लगाथे फेरा रे ।।

दिया बरोबर मांथा के टिकली तन मंदिर ल करे अंजोर ।
मांग के सेंदुर दग दग चमकय जइसे सुरुज भोर ।।

रुप अनुप चमकत हे सुग्घर जइसे आरती के बेरा हे ।
मया मे बंधाये मन जोगीया मयारु के लगाथे फेरा रे ।।

हंसे त ठिंन ठिंन घंटी बजे मज्जिद म होये अजान ।
पंडित के ये गीता लागे मौलवी के लागे कुरआन ।।

तोरन कस अंचरा ह ऊडे पंछी ह छोडे बसेरा ।
मया मे बंधाये मन जोगीया मयारु के लगाथे फेरा रे ।।

बोली गुरतुर हिरदे ल छुवे जस दोहा चौपाई ।
कबीर के सखी मीरा के पद उर्दू के हे रुबाई ।।
पोथी कस गठिया के धर लेंव हिरदे के मै पठेरा ।
मया मे बंधाये मन जोगीया मयारु के लगाथे फेरा रे ।।

तब तब गाँधी आथे रे

जब जब ये धरती दांव लगे ।
नरक कस गली गाँव लगे ।
बैरी मन देख गुर्राथे रे ।
पापी के पाप बढ जाथे रे ।।
तब तब एक आँधी उडाथे रे ।
तब तब एक गाँधी आथे रे ।।

जब सजा लगे जिंदगानी रे ।
करम छाँडे ये गुलामी रे ।।
मनखे बंधुवा बनिहार लगे ।
तन मन ले सबो बिमार लगे ।।
तब तब एक आँधी उडाथे रे ।
तब तब एक गाँधी आथे रे ।।

जब चारो मुँडा अंधियार लगे ।
जिनगी ह घलो दुस्वार लगे ।।
जब तन के लहु सुख जाथे रे ।
हांथ के लाठी टुट जाथे रे ।।
तब तब एक आँधी उडाथे रे ।
तब तब एक गाँधी आथे रे ।।

जब अजादी के चिरईय्या ल ।
ताकय ये पापी बिलईय्या ह ।।
पंजा म अपन दबोचय रे ।
आखा बाखा ल कोंचय रे ।।
तब तब एक आँधी उडाथे रे ।
तब तब एक गाँधी आथे रे ।।

जब आथे रे बात तिरंगा के ।
गऊ माता गीता गंगा के ।।
कोनो बेटा फाँसी चढ जाथे रे ।
शहिद के नाम जड जाथे रे ।।
तब तब एक आँधी उडाथे रे ।
तब तब एक गाँधी आथे रे ।।

इश्क ए गज़ल

इश्क ऐ वफा मे दुनिया सिमट जायेगी।
मोहब्बत मे कायनात पलट जायेगी।
बेवफाई का जाल तुम क्या बुनते हो,
     ऐ मोहब्बत मूषक बन जायेगी।।

काट तेरे जाल नाम ले वफा बन।
कर युध्द जीत लेगी ये भी जंग।
मोहब्बत एक  समन्दर सा दिखेगा,
जब तेरे चेहरे से नफरत की परदा हट जायेगी।।

फिर जपते फिरोगी मोहब्बत की माला।
कभी लैला तो कभी बनोगी मधुबाला।
कहोगी ये (मोहब्बत) जादुई छड़ी है,
चाहे तो दुनिया कठपुतली बन जायेगी।।

होगा शुरू दौर मोहब्बत का,
एक-दुजे के लिये ईबादत का।
खो जाओगे हसीन लम्हो मे,
तेरी नजरो से दुनिया मिट जायेगी।।

फिर होगी नजर से नजर का तकरार,
आँखो मे ही मिलेगी प्यार,
मुस्कुराहट मे उनके होगा जादु,
अब तो इशारो मे भी बात हो जायेगी।।

वो तड़प, वो चाह, वो आशाए।
अनंत उठी अब मिलन की इच्छाए।
मेल होगा जमीं आसमां का,
जब काले बादल फट जायेगी।।

बिजलिया कड़केगी, बरसात होगा,
तन्हा पंछी आजाद होगा।
प्यास मिटेगी पपीहा पंछी की,
उस पल स्वाती नक्षत्र झट जायेगी।।

                   🖋   पवन नेताम 'श्रीबासु'
                          सिल्हाटी, स/ लोहारा
                              कबीरधाम (छग)

गज़ल

तेरी आंखों की नदी में डूब जाना चाहता हूं ,
दर्द की लहरों से मैं रिश्ता बनाना चाहता हूं ।

तुम कहो तो जान दे दूं तुझपे दिल कुर्बान मेरा,
आशिक़ी का फ़र्ज़ मैं दिल से निभाना चाहता हूं ।

सदियों से मैं इश्क़ की कश्ती लिये तट पर खड़ा हूं ,
तुमको अपने साथ कश्ती में बिठाना चाहता हूं ।,

मैं पढ़ाई का पुजारी था बचपन से मगर अब,
प्यार का कासा जवानी में मैं पाना चाहता हूं ।

वैसे मैं ज्यादा पढा इंसां नहीं हूं दोस्तों पर,
आपसे मोहब्बत का पाठ पढ़ना चाहता हूं।

तेरी यादों के सहारे जीना मुश्क़िल है सितमगर ,
इसलिये सांसों से ही पीछा छुड़ाना चाहता हूं।

                             पवन नेताम 'श्रीबासु'
     

रविवार, 27 नवंबर 2016

श्लोक

(1) इंसान को अच्छा से और अच्छे बनने का    
      अनवरत प्रयास करते रहना चाहिये..।
      न कि बुरा से और बुरे बनने का।।

(2) अच्छाई एक न एकदिन बुराई पर
      विजय पाती है।

(3)  इस दुनिया में सम्मान से जीने का सबसे।  
       महान तरीका है कि
       हम वो बने जो हम होने का दिखावा करते है।

(4)

शनिवार, 26 नवंबर 2016

गज़ल...

जागती हैं सोते सोते भी हमारी कल्पनायें,
बेवफ़ाओं ने दिया जो दर्द वो किसको बतायें ।

हम समंदर से मुहब्बत करने वाले लोग हैं तो,
क्यूं किनारों की इबादत में कभी भी सर झुकायें ।

है नहीं आसां किसी का प्यार पाना ज़िन्दगी में ,
आशिक़ी तो ,आसमानी या ख़ुदाई हैं बलाएं ।

गर अमीरी के पहाड़ों पे तुम्हें चढना है यारो,
तो ग़रीबी की ज़मीं को रोज़ ही यारो सतायें ।

गर भरोसा टूटा तो,रिश्तों में आयेंगी दरारें ,
मंदिरों में मस्जिदों में बात ये सबको बतायें ।

ज़िन्दगी के इस सफ़र में ख़ुशियां गर चिढती हैं हमसे,
तो ग़मों के कारवां से दोस्ती क्यूं ना बढायें ।

हम ग़रीबों की मदद करने में हिचके हर समय तो,
ख़ुश ख़ुदा ना होगा चाहे रोज़ ही मस्जिद में जायें ।

                      (2)

ज़माना बदलता है ,पल पल बदलता रहेगा ,
मगर इश्क़ का काम बेख़ौफ़ चलता रहेगा ।

हसीनों से मेरी गुजारिश, वफ़ा तो रखें कुछ,
वफ़ाई का सम्मान हर दिल में पलता रहेगा।

वतन में मज़हबी झगड़ों से बचना होगा,
वतन अपना औरों से वरना पिछड़ता रहेगा ।

तेरे वादों को अब भी महफ़ूज़ रखता है ये दिल,
तेरा दिल दुखाना ,रगों में छलकता रहेगा ।

लुभाती हैं मुझको समंदर की लहरें हमेशा ,
सफ़ीना मेरा साहिलों पर भड़कता रहेगा ।

चुहलबाज़ी बचपन की आती मुझे याद अक्सर,
इन्हीं यादों के दम मेरा दिल बहलता रहेगा।

शराफ़त पहाड़ों की लगती है अच्छी मुझे भी,
ज़मीनी ग़ुनाहों से दिल मेरा डरता रहेगा ।

कुछ और

तेरे धवल हृदय पुहूप मे तितली सी बस जाउं ये चाहत है
तेरी महक से सुरभित मै भी हो जाउं ये चाहत है
मांग लू पनाह रब से तेरे मन की बगिया में
रंग बिरंगे सपन तेरे आँचल में देख लूं ये चाहत है..

जिनगी अनमोल हे"*
जब तक ए मानुस तन चोला हे,
जिनगी ल बने सुग्हर असन जि ले!
काली क हो जहि तेकर काहे ठिकाना,
बेरा के संगे संग जिनगी ल हांसी ठिठोली जि ले!

आँसू ख़ुशी के हों या गम के बहने दो ।
तेरे यादों को मेरे संग में रहने दो ।
अगर बेवफाई है तो प्यार नहीं
वफ़ा है तो एहसास को कहने दो ।

मैं कागज़ हो जाऊ,तू कलम हो जाये।
मैं मंजिल हो जाऊ,तू कदम हो जाये।
मैं, मैं ना रहूँ ,  तुम, तुम ना रहो,
आओ मिल जाये,दोनों हम हो जाये।

मुर्दा हो चुकी बस्ती से..
जिंदगी की खुशबू आ रही हैं,
वो देखो......मेरे देश में...
एक बार फिर कहीं
सोने की चिड़िया चहचहा रही हैं..

तुम पे नजरें गड़ी हैं,तमाम की
ऐसी खूबसूरती भी किस काम की।।

जिसमे शिरकत न हो जाम की
वह महफिल किस काम की।।

माना चर्चा है,चारो तरफ तेरे नाम की
पर तेरे साथ मेरा नाम न जुड़े
ऐसी चर्चा मेरे किस काम की।।

*ऐ परिंदे!!*
*यूँ ज़मीं पर बैठकर क्यों*
*आसमान देखता है..*
*पंखों को खोल, क्योंकि,*
ज़माना सिर्फ़ उड़ान देखता है !!
*लहरों की तो फ़ितरत ही है*
*शोर मचाने की..*
*लेकिन मंज़िल उसी की होती है,
जो नज़रों से तूफ़ान* *देखता है !!*                                                       

तुम्हारा साथ

तुम्हारा साथ ..

जाने क्यूँ होता है मुझको ये आभास
दूर होकर भी लगते हो तुम तो पास ।

यादें तुम्हारी है  अब मधुर मधु -सी
हर लेते हो तुम तो मेरा सब संत्रास ।

तुम्हारा साथ पाकर लगता हो जैसे
जीवन हो गया मेरा बहुत कुछ खास ।

दूर और पास का अंतर हो गया गौण
तुम्हारा जो मिल गया जीवन का साथ ।

तुम्हारा साथ है मेरे लिए सुखद बड़ा
मन में भर देता है नित नये उल्लास ।

मेरा 'सपना' तो हो गया है अब सच
पतझड़ भी बन गया है अब मधुमास ।

गुरुवार, 24 नवंबर 2016

तेरी रूप,तेरी चाह

तेरी नजर से मेरी नजर का तकरार हो गया।
मेरे दिल को तुझ पर ऐतबार हो गया।
क्या ? जादू चलाई तुने नजर से,
कि, एक ही नजर मे प्यार हो गया...।।

ये होठ नही शराब की दरिया है।
जिसे देखते ही होश उड़ा जाती है।
जिसे पाते ही मदहोश हो जाती है।
उस दरिया मे डूबने के बाद,
मेरी प्यास बुझा जाती है..।।

तेरी नशीली होठ कहती है
आ छू ले मुझे...।
तेरी आँखे कहती आ पल्को पे
बिठा लू तुझे...।

तेरे धड़कते हुए दिल,
तेरी काली घटा सी बाल,
तेरे तप्त अंगार सी गाल,
तेरी चमकती हुई कानो की बाली,
ढलती पठार सा तुम्हारा वक्ष स्थल,
खंभ सी तुम्हारी ग्रीवा,
सहम ती हुई तेरी आशाए,
बिजली सी कड़कती तुम्हारी बदन,
तलाशती प्यार की निगाहे,
समेट लेने की तेरी चाह मुझे..।
ये सब पुकारती है मुझे
ये सब पुकारती मुझे...।।

बुधवार, 23 नवंबर 2016

मुक्तक

मासूमियत तुझमे है कान्हा, पर तू इतना मासूम भी नहीं, की मैं तेरे कब्जे में हूँ और तुझे
मालूम भी नही !

😭😭😭😭😭😭😭😭😭
बस मेरे प्यार की यही कहानी है………
मैंने उसे अपना सब कुछ दे दिया था दिल लगाने के बाद
मैंने अपना सब कुछ खो दिया उसके जाने के बाद.......
😭😭😭😭🙏🏼🙏🏼🙏🏼😭😭

👁👁तेरी नजरो की तीर सीधे दिल को छू जाती है....
फिर
कभी तू नजर आती है तो कभी तेरी याद सताती है....😍😍

वाह रे पताल

वाह रे पताल
वाह रे पताल  तेंहा , दिखथच लाल लाल |
गुलाबी चेहरा वाली , गोरी जइसे गाल |

लाल हे पताल तेकर , लाल लाल चानी |
तोर देखे ले मुंह मा , आ जाथे पानी |

तोरे मा भरे हे , बिटामीन भरपूर |
खून के कमी ला ,भगाथच तैंहर दूर |

चटनी ला तोर देख के , मुंह मा पानी आथे |
तोर चटनी मा कतको बासी , गपागप खवाथे |

धनिया अउ मिरचा संग , अबड़ तैं मिठाथच |
लहसुन ला डार देबे , तांह ले बोंबियाथच |

सिलबट्टा के चटनी अउ ,चाउंर के चीला |
गरम गरम खा ले , सबो माई पीला |

अइसन हे गुण , तोर गरीब हे मितान |
बासी संग बिहनिया ले , खाथे किसान |

20-11-16  गजनंद साहू तिल्दा (असौंदा)

गोंदा फूल

*गोंदा फूल*

बड़ सुग्घर दिखथे गोंदा फूल,
लगथे हांसत हवए  खुलखुल।

आनी बानी किसिम  किसिम,
पिवरा लाली कत्था झूले झूल।

कोनो हर खोंचे रहिथे बेनी मा,
मनमोहा जाथे देखते घुलघुल।

नेता मंत्री के करथे तो सुवागत,
तर जाथे माला पहीर के कुल।

चौरा के गोंदा रसिया चलिस,
सुघर गीत ल नई सकच भूल।

मया करके दे  देबे  कोनो ला,
लग जाही फेर मया के   हूल।

लइका मन ला गरूजी ह कथे,
जयंती बर लाहा  खोज  बुल।

बर कइना हर  घलो  पहिराथे,
गोंदा फूल पहिर रथे मिल जुल।
🙏🏻राजकिशोर धिरही🙏🏻

आँखे

👁    आँखें   👁

पहली बार खुली जब आँखें.
सब बोले देखो कैसे मटका
रही है गोल गोल आँखें।
ममतामयी माँ ने प्यार से
चूम ली आँखें।
मारे खुशी के पिता की
भर आई आँखें।
बुवा ने प्यार से काजल लगाया।
दादी ने नजर उतारी।
और पोछ ली आँखे।
आह ये प्यारी आँखें।
सुंदर आँखें।
आँखों ही आँखों मे
प्यार हुवा
और हो गई चार आँखें।

👁👁👁👁👁👁👁
   श्री मती चंद्रकला त्रिपाठी।

गज़ल

वक़्त की कश्ती यूं ही चलती रहेगी ,
मुश्क़िलों से ज़िन्दगी लड़ती रहेगी ।

छांव से मेरा कोई झग़ड़ा नहीं पर ,
धूप आंगन में मेरे पलती रहेगी ।

इश्क़, क़ौमी पत्थरों से कब डरा है ,
आशिक़ी की हर नदी बहती रहेगी ।

हम पहाड़ों की इबादत भी करेंगे ,
औ ज़मीनी पूजा भी चलती रहेगी ।

दुश्मनी की धुन्ध छंट जायेगी यारों,
दोस्ती की रौशनी बढती रहेगी ।

कारखाने मुल्क में बढने लगे हैं ,
भूख़ फिर भी मुल्क में पसरी रहेगी ।

लड़कियों को मान जब तक हम न देंगे,
बेटी कोई ना कोई जलती रहेगी ।

कितना भी परदेश में हम धन कमायें,
गांव में मां बारहा रोती रहेगी ।